पिलखनी स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज।
सरसावा। प्रदेश के चार जिलों में संचालित मेडिकल कॉलेज में आरक्षण की सीमा उल्लंघन पर दिए हाईकोर्ट के निर्णय ने छात्रों को असमंजस में डाल दिया है। जिले के राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी में एमबीबीएस की 100 सीटें हैं। इनमें से 15 सीटें केंद्र सरकार के कोटे की हैं। बाकी 85 पर राज्य से प्रवेश होते हैं। प्रवेश पर शासन की ओर से निर्णय आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
लखनऊ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सहारनपुर, कन्नौज, आंबेडकरनगर और जालौन मेडिकल कॉलेज में सीटों को नए सिरे से भरने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने विशेष आरक्षण शासनादेश को रद्द किया था। उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार ने समाज कल्याण विभाग की योजना के तहत मेडिकल कॉलेज खोले गए थे। इनमें सहारनपुर का मेडिकल कॉलेज भी शामिल है। सरकार की योजना के तहत इन कॉलेजों में अनुसूचित वर्ग के छात्रों के आरक्षण सीमा को 70 फीसदी रखा था।
शासनादेश के तहत मेडिकल कॉलेज की 85 सीटों पर राज्य कोटे के तहत प्रवेश हो रहे हैं। इनमें सामान्य वर्ग के लिए सात, एससी के लिए 62, एसटी के लिए पांच और ओबीसी वर्ग के लिए 11 सीटें आरक्षित की गई हैं। प्रदेश में अनुसूचित जाति को 21, अनुसूचित जनजाति को दो, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 और ईडब्ल्यूएस को दस फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था है। हाईकोर्ट ने नीट 2025 के तहत प्रवेश को नए सिरे से प्रवेश देने के आदेश दिए हैं।
प्रवेश के संंबंध में महानिदेशक की ओर से पत्र प्राप्त हुआ है। पत्र में उन्हें वेबसाइट को लगातार मॉनीटर करने के निर्देश दिए हैं। आगामी आदेशों तक सभी छात्रों का प्रवेश प्रभावी हैं।
- डॉ. सुधीर राठी, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज पिलखनी