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Saharanpur News: फिर छलक उठा सांगाठेड़ा का दर्द, घटना याद कर सिहर उठते हैं ग्रामीण

Thu, 22 Jan 2026 12:58 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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गंगोह। सरसावा कस्बे की कौशिक विहार कॉलोनी में हुई वारदात ने क्षेत्र को दहला दिया है। पति-पत्नी और दो बच्चों समेत पांच लोगों की मौत की खबर जैसे ही फैली, लोगों के जेहन में 22 मार्च 2025 को सांगाठेड़ा गांव में हुए योगेश रोहिला परिवार के हत्याकांड की भयावह यादें ताजा हो गईं। पहले भी कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिसमें अंदरूनी कलह से परिवार तबाह हो गए।
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बता दें, कि 22 मार्च 2025 को गांव सांगाठेड़ा में भाजपा नेता योगेश रोहिला ने लाइसेंसी पिस्टल से अपनी पत्नी 32 वर्षीय नेहा, 11 वर्षीय बेटी श्रद्धा, छह वर्षीय बेटे शिवांश और पांच वर्ष के बेटे देवांश की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। आज भी सांगाठेड़ा में उसका घर और घेर बंद पड़े हैं। परिजन व ग्रामीण उस भयावह दिन को याद कर सिहर उठते हैं। इसी मकान के एक हिस्से में योगेश के चाचा विनोद अपने परिवार के साथ रहते हैं, लेकिन घर के भीतर पसरा सन्नाटा आज भी परिवार और गांव वालों के दिलों पर भारी है। योगेश की चाची मीना का गला आज भी उस घटना को याद कर भर आता है। उन्होंने बताया कि योगेश के बच्चे दिन भर उनके ही पास खेलते रहते थे। पता नहीं उस दिन क्या हुआ कि एक पल में पूरा परिवार उजड़ गया। ग्रामीणों का कहना है कि सरसावा की ताजा घटना ने उनके पुराने जख्म फिर हरे कर दिए हैं।

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मनीता और उसके बच्चों की मौत के बाद बिखर गया परिवार
गागलहेड़ी। गांव बलियाखेड़ी गांव में पिछले सप्ताह मनीता ने अपने दो बच्चों तीन साल के कार्तिक और छह साल की नित्या को जहर देकर आत्महत्या कर ली थी। जरा से गुस्से में आकर मनीता द्वारा उठाए गए इस आत्मघाती कदम ने पूरा परिवार बर्बाद कर दिया। शौचालय पहले इस्तेमाल को लेकर हुए विवाद में मनीता ने बच्चों सहित जहर खा लिया था। इसके बाद मायके वालों ने मनीता के पति नीटू, जेठ अरविंद, जेठानी कविता के खिलाफ हत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कराया था।
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पुलिस ने मनीता के पति नीटू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। परिवार के तीन सदस्यों की मौत और चौथे के जेल जाने के बाद परिवार में अजीब सी खामोशी है। पड़ोसियों ने बताया कि जेठानी कविता और मनीता के दोनों बच्चे गली में हमेशा खेलते कूदते रहते थे, जिस कारण मोहल्ले भर में हर समय चहल पहल रहती थी, लेकिन मनीता के दोनों बच्चों की मौत के बाद मोहल्ले की रौनक ही चली गई। ग्रामीण कहते हैं कि यदि मनीता अपने गुस्से पर जरा सा भी नियंत्रण रख लेती तो आज यह दिन न देखना पड़ता।
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