एक दशक से ज्यादा समय से दो धड़ों में बंटी जमीयत उलमा-ए-हिंद के एकीकरण की कवायद चल रही है। छह सदस्यों की कमेटी इसका जिम्मा संभाल रही है। एकीकरण की राह में कई बाधाएं हैं, जिन्हें दूर करना इतना भी आसान नहीं है। अहम सवाल यही है कि यदि एकीकरण हुआ तो अध्यक्ष कौन बनेगा? इस पर जमीयत के नवनियुक्त कार्यवाहक अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी से फोन पर वार्ता की गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एकीकरण होने पर मौलाना अरशद मदनी साहब को अध्यक्ष बनाया जाता है तो, यह उनके लिए सौभाग्य की बात होगी। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर उनसे बातचीत हुई। पेश है उनसे पूछे गए सवाल और उनके जवाब...
सवाल - कार्यवाहक अध्यक्ष बनने पर जमीयत के विस्तार और बेहतरी को लेकर आपकी क्या कार्ययोजना है ?
जवाब - मैं 25 साल से जमीयत में कार्य कर रहा हूं, अलग-अलग पदों पर और बगैर पद के भी कार्य किया है। जमीयत का मिशन शिक्षा और नौजवानों को
संगठित रूप में कार्य करना है, भारत स्काउट एवं गाइड के कार्यक्रम के मुताबिक यूथ क्लब बनाया है, उस पर ज्यादा फोकस करना चाहते हैं। राष्ट्र के लिए सद्भावना एवं भाईचारा जरूरी है। जिस भावना से देश के निर्माताओं ने बुनियाद रखी, उसे जगाकर रखना है। आपसी झगड़ों को बातचीत से निपटाना चाहिए, यह समझ देश के लोगों को समझना चाहिए। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद न हो।
सवाल - इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच बमबारी और फिर युद्ध विराम पर आपका नजरिया क्या है ?
जवाब - फिलिस्तीन के लोग आबाद थे, दुनियाभर के लोग आकर बसे, 70 साल के दरम्यिान 12 से 13 अनुबंध इस्राइल ने तोड़े। फलस्तीनी पर अन्याय और अत्याचार हुआ है। युद्ध विराम को लेकर भारत ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आज भी भारत उसी राह पर है, इसके लिए देश के नेतृत्व का शुक्रिया है।
सवाल - यदि जमीयत उलमा ए हिंद का एकीकरण होता है तो क्या अध्यक्ष पद पर आप दावेदारी करेंगे ?
जवाब - कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने का मौका मिलता रहे वही जरूरी है, मेरे नजदीकी अरशद साहब से बेहतर कोई नहीं, लेकिन यह फैसला संगठन करेगा, उसके लिए कमेटी बनी हुई है। जब मुझे अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया, उसी दिन दृढ़ निश्चय लिया गया कि एकीकरण करने में पीछे नहीं हटेंगे और सम्मानजनक हर रास्ता अपनाएंगे। अरशद साहब के अध्यक्ष बनने पर मुझे कोई एतराज नहीं होगा, बल्कि सौभाग्य की बात होगी।
सवाल - मदरसों को कंप्यूटर एवं आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जाना चाहिए या नहीं, उसके लिए क्या कदम उठाएंगे।
जवाब - जमीयत ने ओपन स्कूल के नाम से कार्यक्रम शुरू किया है, ओपन स्कूल से हाईस्कूल और इंटर कराएंगे। इसमें करीब 200 मदरसों को जोड़ा जा चुका है। सामान्य शिक्षा और इस्लामिक शिक्षा को और मजबूत किया जाएगा।
सवाल - एनआरसी और सीएए को लेकर जमीयत का आगे क्या रुख रहेगा।
जवाब - जमीयत इसके खिलाफ कोर्ट भी गई है, सीएए और एनआरसी भारत की आत्मा के खिलाफ है। भारतवासियों को एक करने के बजाय, इन फैसलों से बंटवारे की बू आती है।