कलक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण :
- अदालत में बोले अधिवक्ता, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में दाखिल नहीं कर पाए थे साक्ष्य
- सरकारी पक्ष ने जताया एतराज, जिला जज की अदालत में विचाराधीन है मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के मामले में जिला जज की अदालत में शुक्रवार को सुनवाई हुई। मस्जिद पक्ष की ओर से साक्ष्य और दस्तावेज दाखिल किए गए। अब इन्हें रिकॉर्ड में लेने के मामले में दस अगस्त को अदालत निर्णय देगी। इन साक्ष्यों पर विपक्षी पक्ष ने एतराज जताया है।
शुक्रवार को मामले की सुनवाई हुई। मस्जिद प्रबंधन कमेटी की ओर से अधिवक्ता तारीक सिद्दीकी ने अपने पक्ष की ओर से अंतिम दलील रखीं। उन्होंने बताया कि अदालत में सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 41 और 27 के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है। उन्होंने अदालत में अपने पक्ष में खेवट की सत्य प्रतिलिपि और केंद्र सरकार के डाकखाने के किराये का अनुबंध दाखिल किया है।
सरकारी पक्ष ने नए सबूतों के दाखिल करने पर एतराज जताया। वहीं मस्जिद प्रबंधन कमेटी ने बात रखते हुए कहा कि मस्जिद कमेटी का अनुबंध डाकखाने के साथ हुआ है। डाक विभाग केंद्र सरकार के तहत है। संबंधित विभाग ने मस्जिद की मिल्कियत के विषय में जानकारी और पुष्ट करने के बाद ही किराये का अनुबंध किया है। इसके साथ ही उन्होंने किराये की रसीद आदि भी दाखिल की है। खेवट में अभी भी कलक्ट्रेट का नाम नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपील पर आदेश की तिथि दस अगस्त निर्धारित की है। अब मामले में अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
दरअसल, कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के मामले में पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई चल रही थी। अदालत ने 16 जुलाई को मस्जिद को अवैध करार देते हुए 30 दिनों के भीतर हटाने का आदेश दिया था। साथ ही 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसी फैसले के खिलाफ मस्जिद प्रबंधन कमेटी ने जिला जज की अदालत में याचिका दाखिल की थी। अदालत ने प्रबंधन पक्ष की अपील पर सुनवाई करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले पर स्टे लगाया था। साथ ही 6.41 करोड़ रुपये की कोर्ट फीस जमा की सरकारी पक्ष की अपील को भी ठुकरा दिया था।