सहारनपुर। जिस पत्रावली में फर्जीवाड़ा करने पर लिपिक को निलंबित किया गया था। जांच प्रभावित करने के लिए वह पत्रावली ही गायब कर दी गई। खास बात यह है कि नगरायुक्त के निर्देश देने के बाद भी अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई। पत्रावली गायब होने के बाद अब नगर निगम में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
दरअसल, गृहकर जलकर अनुभाग की एक महिला लिपिक ने भवनों के नामांतरण संबंधी पत्रावली पर उच्चाधिकारियों के फर्जी व कूटरचित हस्ताक्षर किए थे। नौ मई 2024 को प्रारंभिक जांच के बाद लिपिक को निलंबित कर जांच बिठाई गई थी।
जांच अधिकारी ने मुख्य कर निर्धारण अधिकारी से पत्रावलियां उपलब्ध कराने को कहा गया, लेकिन मुख्य कर निर्धारण अधिकारी द्वारा पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई गई। नगरायुक्त संजय चौहान ने भी मुख्य कर निर्धारण अधिकारी को पत्र लिखकर जांच अधिकारी को पत्रावली तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद भी जांच अधिकारी को पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई गई। कुछ समय बाद मुख्य कर निर्धारण अधिकारी द्वारा अधिकारियों को बताया गया कि पत्रावली संबंधित लिपिक के पटल से गायब हो गई है।
इस पर नगरायुक्त ने एक सप्ताह के भीतर पत्रावलियां खोजकर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। अन्यथा पत्रावली की प्राथमिकी दर्ज कराने को कहा गया था, लेकिन न तो पत्रावली मिली और न ही प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इस पर नगरायुक्त ने नाराजगी व्यक्ति करते हुए अधिकारी पर गंभीर टिप्पणी भी की है।
n यह था मामला : महिला लिपिक द्वारा गृहकर जलकर अनुभाग के प्रभारी/अपर नगरायुक्त प्रथम राजेश यादव के समक्ष संपत्ति के नामांतरण की फाइल प्रस्तुत की थी। फाइल में मुख्य कर निर्धारण अधिकारी और कर निर्धारण अधिकारी के हस्ताक्षर थे। हस्ताक्षर पर शक होने पर राजेश यादव ने फाइल वापस भेजी थी, हस्ताक्षर गलत हाेने से लिपिक को निलबित कर दिया गया था।