सहारनपुर। अधिक उत्पादन और कम लागत के चलते मंडल के किसानों का रुझान गन्ने की असौजी बुआई के प्रति बढ़ रहा है। पिछले वर्ष जहां मंडल में 12012 हेक्टेयर क्षेत्रफल में असौजी गन्ना बोया गया था। वह इस बार बढ़कर 15650 हेक्टेयर हो गया है। मंडल में पिछले वर्ष की तुलना में 30.28 फीसदी असौजी गन्ना बुआई का क्षेत्रफल बढ़ा है।
मंडल के अधिकतर किसान पहले गेहूं आदि रबी फसलों की कटाई के बाद गन्ने की बुआई करते हैं। कम किसान शरदकालीन या बसंतकालीन गन्ने की खेती करते हैं। लेकिन अब किसानों का रुख असौजी और बसंतकालीन गन्ना बुआई की ओर बढ़ रहा है। बढ़िया उत्पादन के साथ ही सहफसली से होने वाली अच्छी आय के चलते किसानों को यह खेती भा रही है। किसान असौजी गन्ने की बुआई सितंबर के आखिर से लेकर अक्तूबर के अंतिम सप्ताह के बीच गन्ने की बुआई करते हैं। जिससे फसल को परिपक्व होने के लिए पर्याप्त समय भी मिल जाता है। साथ ही उत्पादन भी अधिक प्राप्त होता है। शरदकालीन गन्ने में शुगर रिकवरी भी अधिक होती है। उप गन्ना आयुक्त डॉक्टर दिनेश्वर मिश्र ने बताया कि मंडल में गत सीजन की अपेक्षा इस बार असौजी गन्ना बुआई में 30.28 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। इसकी सहफसली से होने वाली अतिरिक्त आय और गन्ने के बढ़िया उत्पादन से किसानों का रुझान शरदकालीन गन्ना बुआई की ओर बढ़ रहा है।
मुनाफे की है असौजी गन्ने के साथ सहफसली
किसान असौजी गन्ने के साथ विभिन्न फसलों को सहफसली के तौर पर लगाते हैं। इसमें सरसों, गेहूं, पत्ता गोभी, टमाटर, मसूर, लहसुुन सहित अन्य की खेती सहफसल के तौर पर करते हैं। इसके चलते किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। जिससे न सिर्फ किसानों की गन्ने पर होने वाला खर्च निकल जाता है, बल्कि अच्छा लाभ भी हो जाता है। साथ ही गन्ने की असौती खेती का उत्पादन भी अधिक होता है।
मंडल में असौजी गन्ना बुआई का क्षेत्रफल हेक्टेयर में
जनपद----------वर्ष 2018-19---------वर्ष 2019-20------वृद्धि
सहारनपुर--------1865------------------2483---------33.14 प्रतिशत
मुजफ्फरनगर------7285-----------------10024-------27.32 प्रतिशत
शामली---------2862------------------3143--------09.81 प्रतिशत
योग------------12012-----------------15650--------30.28 प्रतिशत
गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार।