सहारनपुर। इसे जागरुकता और टीकाकरण का ही नतीजा माना जाएगा कि जिले में पिछले 16 साल से पोलियो का एक भी मामला सामने नहीं आया। हालांकि पिछले साल पड़ोसी देश में पोलियो केस मिलने पर जिले में पल्स पोलियो अभियान चला था। इस दौरान पांच साल तक के करीब छह लाख बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाई गई थी। बीते साल करीब 128 एएफपी (एक्यूट फ्लेसिड पैरालाइसिस) केस मिले थे। इन मरीजों का स्टूल टेस्ट कराया गया, जिनमें पोलियो का वायरस नहीं मिला है।
शुक्रवार को विश्व पोलियो दिवस है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में पोलियो का आखिरी मरीज 2009 में मिला था। यह मरीज गंगोह ब्लॉक के गांव कुंलाकलां का था। इसके बाद से किसी मरीज में पोलियो की पुष्टि नहीं हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन एएफपी (एक्यूट फ्लेसिड पैरालाइसिस) मरीजों पर नजर रख रहा है। पता लगते ही टीम मरीज के स्टूल का नमूना और जानकारी लेने पहुंचती है।
इन मरीजों में तेज बुखार, सिरदर्द जैसे लक्षण मिल रहे हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि किसी भी मरीज में पोलियो के लक्षण नहीं मिल रहे हैं। पिछले साल पड़ोसी राज्य में पोलियो के केस सामने आए थे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने आठ दिसंबर से 16 दिसंबर तक पल्स पोलियो अभियान चलाया। टीम ने घर-घर जाकर शून्य से पांच साल तक के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई।
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मल नमूने की होती है जांच
एएफपी केस से जुड़े 15 वर्ष तक के बच्चों का स्टूल टेस्ट किया जाता है। मल का नमूना लेकर दिल्ली स्थित उन्हें लैब भेजा जाता है, जहां उसमें पोलियो वायरस की जांच होती है। करीब 10 दिन में जांच रिपोर्ट आ जाती है।
जिले में वर्ष 2009 से पोलियो का मरीज नहीं मिला है। बीते वर्ष अभियान चलाया गया गया था, जिसमें करीब छह लाख बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई गई थी।
- डॉ. प्रवीण कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी