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उपेक्षा और लापरवाही में पिस रहे गोवंश

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सहारनपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में शामिल गोवंश महानगर में बुरी स्थिति में है। नगर निगम द्वारा नवादा रोड पर संचालित गोशाला में जाकर अमर उजाला ने पड़ताल की तो पाया गोशाला में गोवंश को भरी दोपहर में टिन शेड के नीचे फर्श पर बांधा जा रहा है। ऊपर से चिलचिलाती धूप में गर्म फर्श पर 37 डिग्री तापमान में गोवंश की हालत खराब है। जिससे गोवंश बेसुध पड़े रहते हैं। गोशाला की सफाई व्यवस्था भी खराब। कई जगह गोवंश मूत्र और गोबर में लेटा नजर आया।
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नगर निगम ने करीब दो वर्ष पहले नवादा रोड पर कान्हा उपवन गोशाला का शुभारंभ किया था। गोशाला में गोवंश को रखने के लिए टीनशेड डाली गई है, जिसमें सर्दी से बचाव के लिए तिरपाल और गर्मी से बचाव के लिए पंखे लगे हैं। गोशाला के भीतर पर्याप्त मात्रा में चारा भी उपलब्ध है, लेकिन इन दिनों गोशाला में रखे जा रहे गोवंश में से कई गोवंश, जिसमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जैसे गोवंश होने की सजा भुगत रहे हैं। 90 गोवंश रखने की क्षमता वाली गोशाला में करीब एक माह से 400 से अधिक गोवंश रखा जा रहा है। टीनशेट के नीचे एक एक खूंटे में दो से तीन गोवंश बांधे जा रहे हैं, जिससे उनको बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है। शेष गोवंश को गोशाला के भीतर बनी आरसीसी की सड़कों पर बांधा जा रहा है। दोपहर में चिलचिलाती धूप और 37 से 38 डिग्री तापमान में गोवंश गर्म फर्श पर हांफ रहा है। एक गाय गर्मी के कारण बेसुध नजर आई, जिसकी खड़े होने की हिम्मत नहीं हो रही थी। कई छोटे बच्चों, जिनमें बछड़ा और बछड़ी दोनों शामिल हैं भी धूप में तड़प रहे हैं।
आत्मनिर्भर होना भी बढ़ा रहा मुश्किल
नगर निगम गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने पर अधिक ध्यान दे रहा है। इसके लिए दूध बेचने के साथ ही गोबर से कंडे आदि बनाकर बेचे जा रहे हैं। गोमूत्र से गोनाइल (फिनायल) बनाकर बेचा जा रहा है। गोशाला की बिजली आपूर्ति के लिए गोबर का गैस प्लांट लगाया गया है, जिससे जेनरेटर चलाकर गोशाला में बिजली आपूर्ति की जा रही है। हर माह हजारों रुपये की कमाई और बचत करने की बात निगम अधिकारी कह रहे हैं, लेकिन गोशाला के भीतर की हालत से वह शायद वाकिफ नहीं हैं। गैस प्लांट और अन्य उत्पाद बनाने के लिए काफी जगह घेरी गई है, जिसकी वजह से भी गोशाला में गोवंश के लिए जगह कम हुई है।
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मिलते हैं 30 रुपये, खर्च होते हैं 100 रुपये
गोशाला में रहने वाले प्रत्येक गोवंश के लिए शासन प्रतिदिन का 30 रुपये देता है, लेकिन निगम का प्रत्येक गोवंश पर 100 रुपये से अधिक का खर्चा आता है। यह अतिरिक्त खर्च नगर निगम गोशाला से कमाई करने के साथ ही लोगों से चंदा लेकर पूरा करता है। लोग चंदे में चारा आदि देते हैं। नगरायुक्त प्रति माह 20 हजार रुपये अपनी जेब से देते हैं। प्रत्येक सप्ताह गोशाला की रिपोर्ट शासन को जाती है, जिसके हिसाब से शासन बजट घटाता और बढ़ाता रहता है।
बगल में बना रहे नई गोशाला : प्रभारी
गोशाला प्रभारी एवं पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा ने बताया कि महानगर में सड़कों पर भ्रमण करने वाले गोवंश को पकड़कर गोशाला में रखा जा रहा है। इसकी वजह से वहां क्षमता से अधिक गोवंश हो गया है। चूंकि हमारे पास अन्य कोई जगह नहीं है। ऐसे में गोशाला में अधिक संख्या में गोवंश हो गए हैं। प्रयास यही है कि गोवंश को किसी प्रकार की समस्या न हो। नगर निगम गोशाला की बगल में खाली पड़ी भूमि पर गोवंश को रखने के लिए व्यवस्था कर रहा है, जो जल्द ही पूरी होगी।
जिले के गो आश्रय स्थलों में है 2000 गोवंश
सहारनपुर। जिले में 11 ब्लॉक सहित 15 गो-आश्रय स्थल हैं। जिसमें क्षमता से अधिक गोवंश हैं। बलियाखेड़ी, पुवांरका, मुजफ्फराबाद, साढ़ौली कदीम, सरसावा, नकुड़, गंगोह, नानौता, रामपुर मनिहारान, देवबंद, नागल, कलसिया, तीतरो, जिला पंचायत का नानौता, नगर निगम का नवादा में गो-आश्रय स्थल है, जिनमें वर्तमान में 2000 गोवंश हैं, जबकि इनमें पशु रखने की क्षमता 1500 है। तीतरो की गोशाला में गोवंश को पर्याप्त चारा नहीं मिल रहा है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी राजीव सक्सेना का कहना है कि गोवंश अधिक हैं, चारे के लिए ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों से भूसा दान करने की अपील की गई है। नैनखेड़ी की प्रधान पंकज सैनी ने एक बुग्गी भूसा दान दिया है।
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