तीतरों। कलसी में निर्माणाधीन शामली-अंबाला हाईवे के लिए अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे के लिए 348 दिनों से चल रहे किसानों के धरने को तहसील प्रशासन ने जबरन खत्म करा दिया। किसानों के टेंट को बुलडोजर से उखाड़ दिया गया और वहां पर मिट्टी भराव कर दिया। किसानों की अधिकारियों के साथ जमकर नोकझोंक हुई। छह किसानों को हिरासत में लिया गया है।
n एसडीएम के कहने पर नहीं हटे, तब चला बुलडोजर : सोमवार को नकुड़ एसडीएम संगीता राघव धरने पर पहुंचीं। उन्होंने किसानों से धरना समाप्त करने को कहा, लेकिन किसानों ने इन्कार कर दिया। इस पर एसडीएम ने भारी पुलिस बल व आरआरएफ जवानों की मदद से धरनास्थल पर लगे टेंट को बुलडोजर से हटाते हुए मिट्टी भराव शुरू करा दिया।
मौके पर मौजूद किसान संदीप कुमार, घनश्याम, राजकुमार, दिलशाद, मुकेश सैनी ने विरोध किया, जिस पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर थाने भिजवा दिया। इस दौरान किसानों की पुलिस के साथ जमकर नोकझोंक हुई। एसडीएम ने बताया कि पूर्व में भी दो बार धरने को समाप्त कराया जा चुका है, लेकिन किसान शासन में अपना पक्ष रखने की बजाय हाईवे अथाॅरिटी के काम में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। भूमि को अथाॅरिटी के सुपुर्द किया गया है। इस दौरान कई थानों की फोर्स और आरआरएफ के जवान मौजूद रहे।
n मरने के लिए बुलडोजर की तरफ दौड़ा किसान : प्रशासन के कब्जा लेने के दौरान किसान ऋषिराम ने आपा खो दिया और वह बुलडोजर की तरफ दौड़ पड़ा। यह देख अधिकारियों हाथ पांव फूल गए।
पुलिसकर्मियों ने तेजी दिखाते हुए किसान को पकड़ लिया। किसान का रोते हुए कहना था कि उनकी जमीन चली गई, मुआवजा नहीं मिला तो वह जिंदा रहकर क्या करेगा। परिवार के लोगों का पेट कैसे भरेगा।
एसडीएम ने उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन नहीं मानने पर थाने भिजवा दिया गया।