सहारनपुर। ऐसे मरीज, जो किन्हीं कारणों से अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते हैं या फिर इलाज छूट गया है और गंभीरता की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे मरीजों को खोजकर इलाज कराने की जिम्मेदारी चिकित्सा विभाग की है। इसी लिए अब दस्तक अभियान शुरू किया गया है, जिसमें चिकित्सा विभाग की टीमें घर-घर जाकर मरीजों का पता लगाएंगी।
12 जुलाई से 25 जुलाई तक चलने वाले अभियान को लेकर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजीव मांगलिक ने बताया कि अभियान के तहत आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और फ्रंटलाइन वर्कर्स को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशिक्षित फ्रंटलाइन वर्कर घर-घर जाकर विभिन्न रोगों के नियंत्रण एवं उपचार की जानकारी लोगों को देंगे, साथ ही आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अभियान के तहत कुपोषित बच्चों तथा विभिन्न रोगों के लक्षणयुक्त व्यक्तियों का चिह्नीकरण करेंगी। कोरोना से ठीक हुए मरीजों, एक सप्ताह से ज्यादा बुखार या खांसी के मरीजों तथा कुपोषित बच्चों पर अधिक ध्यान देने के लिए कहा गया है। ऐसा एक भी मरीज इलाज के अभाव में न रहने पाए। इसके लिए खास निर्देश दिए गए हैं। मरीजों का न केवल चिह्नीकरण किया जाएगा, बल्कि संबंधित चिकित्सा केंद्रों पर उपचार कराया जाएगा। कुपोषित मिलने वाले बच्चों की सूची बाल विकास एवं पुष्टाचार विभाग को भेजी जाएगी। उनके माध्यम से बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में रेफर किया जाएगा। इसी तरह टीबी के मरीजों की सूची क्षय रोग विभाग को सौंपी जाएगी और इलाज कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान पूर्व के वर्षों में भी चलता आया है, जिसके जरिए जनपद में बड़ी संख्या में टीबी के मरीज खोजकर उनके उपचार की व्यवस्था कराई गई है। कुपोषित बच्चों को लेकर विशेष ध्यान सरकार दे रही है। जनपद में करीब 20 हजार बच्चे कुपोषित और करीब तीन हजार अति कुपोषित हैं।