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नौकरी बचाने को सड़कों पर उतरे शिक्षक

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अपनी मांगों को लेकर कलक्ट्रेट में ज्ञापन देने जातीं कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की शि - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों के शिक्षक और शिक्षिकाएं नौकरी बचाने के लिए सोमवार को सड़कों पर उतर आए। कलक्ट्रेट, विकास भवन और बीएसए कार्यालय पर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर संविदा बचाने की गुहार लगाई।
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सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंची शिक्षिकाओं ने बताया कि वह दस से 15 वर्ष से संविदा पर नौकरी कर रही हैं। मगर बीते दिनों परियोजना निदेशक लखनऊ की ओर से एक आदेश जारी किया गया, जिसमें हिंदी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी विषयों को ही मुख्य विषय माना गया है। गृह विज्ञान, कंप्यूटर, शारीरिक शिक्षा, संगीत और कला को गौण विषय माना गया है। जबकि नियुक्ति के दौरान विषयों को इस तरह से नहीं बांटा गया था। शासनादेश के अनुसार अब मुख्य विषयों को फुल टाइम टीचर ही पढ़ाएंगे, गौण विषयों को पार्ट टाइम वाले शिक्षक पढ़ाएंगे। कई ऐसे वार्डन भी हैं, जो गौण विषयों की हैं। नए आदेश के अनुसार अब उनका वेतन भी एक तिहाई हो जाएगा। उन्होंने बताया कि पर्यावरण, संगीत और गृह विज्ञान विषयों को खत्म किया जा रहा है। इस प्रकार नए शासनादेश से एक ओर जहां कई शिक्षकों की नौकरी जा रही है। वहीं अनेक शिक्षकों का वेतन एक तिहाई रह जाएगा। शासनादेश से करीब 35 शिक्षक और शिक्षिकाएं प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को ज्ञापन देकर नौकरी बचाने की गुहार लगाई गई है।
कस्तूरबा गांधी विद्यालयों के कुछ शिक्षक हमसे मिले थे। उन्होंने ज्ञापन भी सौंपा है। मगर चूंकि आदेश शासन का है। ऐसे में स्थानीय स्तर से कुछ नहीं हो सकता। शासन का जो भी आदेश है उनका अनुपालन किया जाएगा।
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रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए।
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