सहारनपुर। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी से पहले विद्यार्थी तनाव के दौर से गुजरते हैं। लिहाजा तनाव रहित होकर आठ घंटे की नींद जरूर लें और भोजन के विकल्प का सही चयन करें ताकि याद्दाश्त के साथ शरीर में स्फूर्ति का संचार हो सके।
परीक्षा का नाम सुनते, कई परीक्षार्थियों में घबराहट होने लगती है, लेकिन चिकित्सकों की मानें तो वे नियमित दिनचर्या को अपना लें और खान-पान पर ध्यान दें तो किसी तरह की चिंता की बात नहीं है। फिजीशियन डॉक्टर संजीव मिगलानी बताते हैं कि विद्यार्थियों को परीक्षाओं की तैयारी के दौरान पूरे आठ घंटे की अच्छी नींद लेने की जरूरत है। रात में जल्दी सो जाएं और सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करें। रात में देर तक जागने से अगले दिन नींद का अहसास रहता है, जिससे पढ़ाई में मन नहीं लगता है। आलस्य छाया रहता है। वहीं इन दिनों खानपान में सुधार लाने की बेहद जरूरत है। आलस्य बढ़ाने वाले भोजन से बचें और स्फूर्ति और एनर्जी लाने वाले पदार्थों का सेवन करें।
विद्यार्थी यह खाएं
चिकित्सकों की मानें तो रात में आठ बादाम भिगोकर रख दें और अगले दिन सुबह खाएं, साथ ही अखरोट का सेवन भी याद्दाश्त बढ़ाने में मदद करता है। बादाम और अखरोट नहीं खरीद सकते तो मूंगफली भी बेहतर विकल्प है। सब्जियों में पत्तेदार सब्जियां जैसे मेथी, पालक और बथुआ काफी फायदेमंद है। ग्रीन-टी भी अच्छा विकल्प है। फल ताजे ही खाएं, जिनमें सेब, स्ट्रॉबेरी, खुमानी, जामुन ले सकते हैं। जूस पीने से बचें चाहे खुला हो या पैकिंग वाला। भोजन सादा रखें, जिसमें रोटी, दाल और हरी सब्जियां ले सकते हैं।
तली हुई चीजें और फास्ट फूड खाने से बचें
चिकित्सकों ने विद्यार्थियों को फास्ट फूड जैसे चाऊमीन, मोमोज, बरगर, पिज्जा, स्पंज रोल, मंचूरियन आदि खाने से मना किया है। साथ ही तली हुई चीजें जैसे पकोड़ी, समोसा, पराठा भी ठीक नहीं है। चिकित्सकों का मानना है कि तली हुई चीजें खाने से शरीर में सुस्ती आती है और दिमाग में खून का सर्कुलेशन ठीक से नहीं होता है। इसकी वजह से पढ़ाई में मन नहीं लगता है।
मैनेजमेंट ठीक होना चाहिए: डॉक्टर
मनोचिकित्सक डॉक्टर राजकुमार सिंह का कहना है कि छात्र अपने मैनेजमेंट यानि दिनचर्या पर जरूर ध्यान दें। किसी विद्यार्थी को लिखकर पढ़ने में आसानी से समझ में आता है तो किसी को आपस में डिस्कशन कर तो किसी को बार-बार दोहराकर। जिस विद्यार्थी को जैसे बेहतर तरीके से समझ में आता हो वह उसी तरह पढ़े।