सहारनपुर। फर्नीचर खरीद घोटाले में जिला समन्वयक निर्माण सहित तीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए सदर बाजार थाना पुलिस को तहरीर दी गई है। पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में भी लिया है, जिनसे पूछताछ चल रही है।
एनपीआरसी (न्याय पंचायत संसाधन केंद्र) वाले विद्यालयों में फर्नीचर खरीदने को लेकर भाजपा नेता ने शिकायत की थी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रमेंद्र कुमार सिंह ने पुवांरका के 12 विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया था। फर्नीचर की गुणवत्ता खराब मिली थी। संबंधित प्रधानाध्यापकों को सपष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए थे। प्रधानाध्यापकों ने बीएसए को बताया था कि फर्नीचर गाड़ियों के द्वारा विद्यालय पहुंचाया गया था। चालक ने जिला समन्वयक निर्माण विजयंत से बात कराई थी। विजयंत पर आरोप है कि उन्होंने विभाग की ओर से फर्नीचर भेजे जाने की बात कहते हुए भुगतान के लिए दबाव बनाया था।
मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी ने रविवार 20 सितंबर को विजयंत को नोटिस जारी करते हुए 22 सितंबर तक स्पष्टीकरण देने को कहा था। विजयंत ने 21 सितंबर (सोमवार) को ही स्पष्टीकरण बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेज दिया था। विजयंत ने फंसाए जाने के लिए कुछ लोगों द्वारा षड्यंत्र रचने की बात स्पष्टीकरण में कही। विजयंत द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण की सुनवाई में अधिकारी संतुष्ट नहीं हुए। ऐसे में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से विजयंत, गाड़ी चालक नफीस और फर्नीचर भेजने वाले तुषार शर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाना सदर बाजार में तहरीर दी है। उधर, थाना सदर बाजार प्रभारी पंकज पंत का कहना है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से थाने में तहरीर दी गई है। रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
फर्नीचर खरीद घोटाले में जिला समन्वयक विजयंत ने जो स्पष्टीकरण दिया है वह संतोषजनक नहीं है। जिला समन्वयक के साथ ही गाड़ी चालक नफीस और फर्नीचर भेजने वाले तुषार शर्मा के विरुद्घ थाना सदर बाजार में तहरीर दे दी है। - रमेंद्र कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
समन्वयक के साथ अफसर भी हैं जिम्मेदार : पुंडीर
सहारनपुर। विद्यालयों में फर्नीचर खरीद में घोटाले की शिकायत करने वाले भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक रामपाल सिंह पुंडीर ने प्रकरण की जांच और कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। रामपाल सिंह पुंडीर का कहना है कि मामले में बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध है, सिर्फ समन्वयक ही इतना बड़ा घोटाला करने का जिम्मेदार नहीं हो सकता है। फर्नीचर खरीदने के लिए विभाग की तरफ से प्रति स्कूल 80-80 हजार रुपये भिजवाए गए। हर स्कूल में अलग फर्म से फर्नीचर क्यों नहीं खरीदा गया और यदि चुनिंदा फर्म से ही फर्नीचर खरीदवाया गया तो टेंडर प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई। रामपाल सिंह पुंडीर का कहना है कि क्या विभागीय अफसर किसी भी तरह की मॉनिटरिंग नहीं कर रहे थे, जो घोटाला हो गया।