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धान की फसल में दिखाई दे रहे फाल्स स्मट रोग के लक्षण

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विकास पंवार - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। जनपद में धान की फसल पर फाल्स स्मट (हल्दी गांठ) रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इससे चिंतित किसान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से संपर्क कर रहे हैं और फसल को रोग से बचाव की जानकारी ले रहे हैं।
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धान की फसल में बाली निकलते समय जब वातावरण में अधिक आर्द्रता होने के साथ ही बादल भी छाए रहते हैं, तब फाल्स स्मट रोग का बिजाणु बाली के दानों को प्रभावित करता है। इस रोग के बिजाणु मृदा में ही रहते हैं। इसलिए कृषि वैज्ञानिक बीज शोधन के साथ मृदा शोधन पर भी जोर देते हैं। इससे प्रभावित दानों पर पीले रंग का पाउडर दिखाई देने लगता है। जिसे छूने पर वह हाथ पर लग जाता है। यह रोग फसल में लगने के बाद फफूंदी नाशक का छिड़काव भी काम नहीं करता। इसलिए फसल में इसके लक्षण दिखाई देते ही रोग का उपचार करना चाहिए।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि जिस बाली में यह रोग लगता है, उसके दाने न सिर्फ खराब हो जाते हैं बल्कि वजन भी कम हो हो जाता है। इस रोग से अधिक प्रभावित पौधों की बालियों को सावधानी पूर्वक काट कर खेत से बाहर निकालकर जला देना चाहिए। फसल में यूरिया का प्रयोग संतुलित मात्रा में प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि गांव बढेडी कोली के किसान मेनपाल, हरेंटी के श्याम कुमार और हरियाबांस के मेहरबान के धान में इसके लक्षण दिखाई दिए हैं।
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रोग पर नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड की दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर खेत में 50 प्रतिशत बालियां आने के बाद छिड़काव करना फायदेमंद रहता है। इसके अलावा क्लोरथनोनिल 75 प्रतिशत डब्लूपी की दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर प्रभावित फसल पर छिड़काव करना मुफीद रहता है।

धान में लगा फाल्स स्मट रोग- फोटो : SAHARANPUR

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