जिंदगी जा रही तनाव की ओर, लोग तोड़ रहे सांसों की डोर
सहारनपुर। कोरोना संक्रमण वाले इस साल में अलग-अलग कारणों से हताश होकर अपनी जिंदगी से नाता तोड़ने वालों की संख्या अधिक रही है। तनाव का स्तर अधिक होना इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। पिछले साल जिले में 142 लोगों ने आत्महत्याएं की थीं। इस साल अगस्त तक ही आंकड़ा 108 तक पहुंच गया है। मार्च से अब तक कोरोना संक्रमण काल में ही खुदकुशी के 24 मामले सामने आए हैं। आत्महत्या करने वालों में पुलिसकर्मी और उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हैं।
पुलिस, प्रशासन, अधिवक्ता और कोर्ट में आए प्रार्थनापत्रों के माध्यम से अधिकतर घटनाओं के पीछे कारण अलग-अलग रहे। इनमें मुख्य रूप से पारिवारिक विवाद, जमीन से जुड़े विवाद, आर्थिक परेशानी, प्रेम प्रसंग सहित अन्य कारण रहे हैं। इन कारणों से बढ़ा तनाव ही ऐसी घटनाओं की बड़ी वजह बन गया। मनोरोग चिकित्सकों की मानें तो कोराना काल में तनाव का यह स्तर कुछ ज्यादा रहा। शायद इसी कारण ऐसा हुआ है।
आत्महत्या की कुछ प्रमुख घटनाएं
केस एक : अगस्त माह में शहर के झोटेवाला क्षेत्र में शोएब ने खुद फंदे पर झूलने से पहले अपनी दो साल की बेटी की हत्या तक कर दी थी। ससुराल से चल रहे विवाद में शोएब बेहद तनाव में था।
केस दो : अगस्त में ही रेलवे स्टेशन पर तैनात आरपीएफ सिपाही प्रमोद कुमार की पत्नी ने फंदे पर झूलकर जान दी थी। परिवार में विवाद की बात शुरुआती तौर पर सामने आई थी।
केस तीन : कोरोना संक्रमण की शुरुआत के दिनों में गन्ना विकास परिषद शेरमऊ कार्यालय में तैैनात कर्मचारी आदेश कुमार ने तो कोरोना की दहशत में ही अपनी जान दे दी थी। वह घबरा गया था कि उसे कोरोना हो गया तो क्या होगा।
केस चार : दयाल कालोनी में जून माह में यातायात पुलिस के सिपाही उपेंद्र ने ड्यूटी से लौटने के बाद घर पहुंचकर फंदे पर झूलकर जान दे दी थी। वह काफी समय से बीमारी के कारण तनाव में चल रहा था।
जिले में आत्महत्याओं की स्थिति
2019 में पूरे वर्ष हुई आत्महत्याएं 142
2019 में अगस्त तक घटनाएं 98
इस साल अगस्त तक घटनाएं 108
कोरोना काल में आत्महत्या के मामले -- 24
30 से 35 साल की उम्र में आत्महत्या -- 22
महिलाओं की आत्महत्या -- 55
पारिवारिक, जमीन विवाद और तनाव के कारण आत्महत्याएं -- 37
दहेज उत्पीड़न के आरोप वाली घटनाएं -- 21
प्रेम प्रसंग और अन्य कारण से घटनाएं -- 20
(नोट: पुलिस, अधिवक्ताओं और प्रशासन से मिले अनुमानित आंकड़े)
आत्महत्या के पीछे रहते हैं कई कारण : डीआईजी
डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल कहते हैं कि हो सकता है कि पिछले वर्षों के मुुकाबले इस बार ऐसी घटनाएं कुछ ज्यादा रही हों। आत्महत्या के पीछे कई कारण जिम्मेदार रहते हैं। कुछ आत्महत्या तो दहेज उत्पीड़न जैसे कारणों से होती हैं। कोरोना संक्रमण काल का असर तो हर किसी पर पड़ रहा है, मगर इसे अपने ऊपर हावी नहीं होने देना है। जिंदगी में उतार चढ़ाव आते रहेंगे। इनसे घबराने से काम चलने वाला नहीं है।
जिंदगी गंवाइए नहीं, जिंदगी बचाइए और संवारिए
मनोरोग चिकित्सक डॉ. अमरजीत सिंह पोपली मानते हैं कि कोरोना संक्रमण काल में तनाव का स्तर बढ़ा है। लेकिन यदि गौर करेंगे तो पाएंगे तो इन आत्महत्याओं के पीछे भी अधिकतर कारण वे ही हैं, जो पहले से रहे हैं। जिंदगी गंवाइए नहीं, जिंदगी बचाइए और इसे संवारिए। यह कोराना काल भी निकल जाएगा। गीत, संगीत, योग या अन्य कोई शौक आपका हो तो उसमें अधिक समय लगाएं। अपने परिजनों, दोस्तों और शुभचिंतकों से लगातार संपर्क में रहें। इससे तनाव कम होगा।