सहारनपुर। गन्ना किसानों को आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसान को गन्ने की खेती में पांच आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा। इन तकनीकों का प्रयोग कर आदर्श मॉडल खेती करने वाले मंडल के 190 किसानों को उत्तम गन्ना कृषक का प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
गन्ना विभाग किसानों को गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने पर जोर दे रहा है। उन्होंने इसका नाम पंचामृत दिया है। इसका उद्देश्य गन्ने की खेती की लागत को कम करना, पानी की बचत, भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाना, घरेलू मांग के अनुसार खाद्यान्न, दलहन, तिलहन और सब्जियों का उत्पादन सह फसली के तौर पर करना है। इसमें गन्ने की ट्रेंच विधि से बुआई, दो कुंडों के बीच की जगह में सह फसली, गन्ने की पेड़ी का प्रबंधन, गन्ने पेड़ी की ट्रेश मल्चिंग और टपक विधि से सिंचाई का आदर्श मॉडल बनाया है। इससे गन्ने की लागत को कम और उत्पादन को बढ़ाया जा सके।
यह है गन्ने की खेती का आदर्श मॉडल
गन्ना विभाग ने गन्ने की खेती का आदर्श मॉडल तैयार किया है। इसमें पांच तकनीक होने के कारण इसे पंचामृत की संज्ञा दी है। इसमें ट्रेंच प्लांटिंग, सह फसली, रेटून मैनेजमेंट, ट्रेश मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई शामिल हैं। जो किसान इन तकनीकों का प्रयोग करेगा उसे उत्तम गन्ना कृषक प्रमाणपत्र से सम्मानित किया जाएगा। आदर्श मॉडल प्लाट का न्यूनतम क्षेत्रफल 0.5 हेक्टेयर होना चाहिए। प्रत्येक गन्ना विकास परिषद से न्यूनतम 10 -10 आदर्श मॉडल का चयन करना अनिवार्य रहेगा।
3564 हेक्टेयर में ड्रिप लगाने का लक्ष्य
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मंडल में पंचामृत का इस्तेमाल करने वाले 190 उत्तम गन्ना कृषकों का चयन होगा। इस बार शरद कालीन गन्ना बुआई का लक्ष्य 17431 हेक्टेयर का है। इसमें सह फसली कराई जाएगी। साथ ही 3564 हेक्टेयर में सिंचाई के लिए ड्रिप लगवाने का लक्ष्य रखा है। - डॉ. दिनेश्वर मिश्र, उप गन्ना आयुक्त।