यूक्रेन से लौटने के बाद अपने माता पिता के साथ चिलकाना का शोएब कुरैशी
- फोटो : SAHARANPUR
यूक्रेन छोड़ सीमावर्ती देशों में पहुंचे छात्र, परिजनों ने ली चैन की सांस
रामपुर मनिहारान/छुटमलपुर (सहारनपुर)। रूसी राष्ट्रपति के दूसरे देशों के नागरिकों से यूक्रेन की राजधानी कीव को तत्काल छोड़ देने की चेतावनी जारी करने के बाद जिले के बहुत से छात्र-छात्रा अपने हास्टल और बंकर छोड़ कर पड़ोसी देशों तक पहुंच गए हैं। इससे उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है।
रामपुर मनिहारान के गांव साढ़ोली हरिया की काजल चौधरी भी अपने साथियों के साथ बंकर छोड़ ट्रेन से लवीव पहुंची। जहां से वह बस से रोमानिया बार्डर पहुंच गई है। काजल के पिता सुभाष सिंह ने बताया कि अब उसके सुरक्षित स्वदेश वापसी की संभावना हो गई है। गांव हंगवाली के देवेंद्र प्रधान ने बताया उनके बेटा गौरव व भतीजा अभिनव भी कीव छोड़ कर एक किमी की दूरी तय कर पड़ोसी देश मलडोजा पहुंच गए हैं। गांव घाटेड़ा निवासी देवेंद्र का बेटा अजय कुमार भी लवीव शहर को छोड़ हंगरी बॉर्डर पहुंच गया है। देवेंद्र्र सिंह ने बताया कि उनका बेटा लगातार फोन से उनके संपर्क में है। छुटमलपुर की संत नगर कॉलोनी निवासी डॉ. कंवलजीत सिंह ने बताया कि उनका बेटा हर्ष सोमवार रात बॉर्डर पार कर रोमानिया के भारतीय शिविर में पहुंच गया है। अब जा कर उन्हें सुकून मिला है कि बेटा खतरे से बाहर हो गया है। छुटमलपुर की हरिजन कॉलोनी निवासी डॉ. मोहम्मद कामिल का बेटा आस मोहम्मद भी कीव से निकल गया है। डॉ. कामिल ने बताया कि वह सोमवार की रात कीव से निकला था। ट्रांसपोर्ट की कमी के चलते सफर मुश्किल हो रहा है। वह यूक्रेन के सीमावर्ती स्टेट उजहुड तक पहुंच गया है। उम्मीद है रात तक वह हंगरी पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि अल्लाह का शुक्र है कि अब बेटा खतरे से काफी हद तक बाहर हो गया है।
रोमानिया के कैंप में पीयूष राणा- फोटो : SAHARANPUR
अपने साथियों के साथ साढोली हरिया की काजल- फोटो : SAHARANPUR