फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छात्राओं ने कवियों से सीखा कविता का ककहरा

विज्ञापन
खुशी - फोटो : SAHARANPUR
विज्ञापन
सहारनपुर। हाइकु क्या होता है, कैसे इसकी रचना होती है, कैसे दोहा और माहिया लिखा जाता है, हिंदी साहित्य की इन विधा को सहज भाव में समझाया और सिखाया गया है। अमर उजाला फाउंडेशन के हिंदी हैं हम अभियान के तहत सोमवार को श्री हिंदू कन्या इंटर कॉलेज में आओ कवियों से सीखें कविता का ककहरा कार्यक्रम हुआ। हिंदी साहित्यकारों ने काव्य रचना की महत्वपूर्ण जानकारी दी तो, छात्राओं से कविताओं को लेकर सवाल-जवाब भी हुए। सही जवाब देने वाली छात्राओं को पुरस्कृत किया गया।
विज्ञापन

श्री हिंदू कन्या इंटर कॉलेज के सभागार में आयोजित कार्यशाला में सबसे पहले मेहमान साहित्यकारों को पुष्प भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यशाला में साहित्यकार हरिराम पथिक ने छात्राओं को जापानी विधा हाइकु के बारे में बताया और समझाया। उन्होंने बताया कि हाइकु कविता लिखने की दुनिया की सबसे छोटी विधा है। यह तीन पंक्तियों की होती है। पहली पंक्ति में पांच, दूसरी में सात और तीसरी में पांच अक्षर होते हैं। यानी कुल 17 अक्षरों की सबसे छोटी कविता होती है। उन्होंने उदाहरण के तौर पर हाइकु लिखकर छात्राओं को दिखाया जो ‘पैरों में जान, इरादों में दृढ़ता, राहें आसान’ था। अन्य हाइकु भी लिखे। उन्होंने बताया कि हाइकु तुकांत भी होते हैं और अतुकांत भी। समझाने के बाद उन्होंने छात्राओं से सवाल पूछे। सही जवाब देने पर उन्हें पुरस्कार स्वरूप पुस्तक भेंट की। इसके बाद साहित्यकार विनोद भृंग ने छात्राओं को दोहा लेखन के बारे में समझाया। उन्होंने बताया कि दोहा हिंदी का सबसे छोटा और मात्रिक छंद है। इसमें दो पंक्ति और चार चरण होते हैं। पहले और दूसरे चरण में 13-13 तथा तीसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएं होती हैं। उन्होंने दोहे गाकर भी सुनाए। अंत में साहित्यकार डॉ. विजेंद्रपाल शर्मा ने माहिया लेखन के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि यह तीन पंक्तियों का होता है। पहली पंक्ति में 12, दूसरी में दस और तीसरी में 12 मात्राएं होती हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रधानाचार्य डॉ. कुदसिया अंजुम, सिम्मी बजाज, सविता, आरती, ज्योत्सना, मंजू यादव, वृंदा, पूनम, सुमन आदि का सहयोग रहा।
छात्राओं की बात
-- छात्रा खुशी कार्यशाला में हिस्सा लेने के बाद खुश नजर आईं। खुशी ने बताया कि कार्यशाला के माध्यम से कविता लेखन की विधा सीखने का मौका मिला है। भविष्य में भी हिंदी से जुड़े इस तरह के कार्यक्रम होने चाहिए।
विज्ञापन

-- शिफा ने बताया कि हिंदी और उर्दू दोनों भाषाएं बेहद पसंद हैं, क्योंकि दोनों की पैदाइश भारत में हुई है। मगर उन्हें हिंदी से अधिक प्रेम है, क्योंकि यह हमारी मातृभाषा है। कार्यशाला से काफी कुछ सीखने को मिला।
-- साक्षी ने बताया कि कार्यशाला के माध्यम से हिंदी को लेकर जो बातें उन्हें बताई गईं वह अनुकरणीय हैं। वह अब से अपने हस्ताक्षर हिंदी ही में करेंगी और जहां तक संभव होगा अधिकतर लेखन हिंदी में ही करेंगी।
-- कक्षा 12 की काजल ने बताया कि पहली बार कवियों के मुंह से हिंदी कविताएं सुनीं। कार्यक्रम बेहद अच्छा था। हाइकु, दोहा और माहिया लेखन की विधा को सरलता के साथ समझाया गया है।
हिंदी के अधिक से अधिक प्रचार और प्रसार के लिए अमर उजाला फाउंडेशन सराहनीय कार्य कर रहा है। हिंदी की सेवा के लिए इस कार्यक्रम से जुड़कर अच्छा लगा। अधिक से अधिक भाषाएं सीखना और बोलना अच्छा है, मगर मातृभाषा को बिल्कुल न भूलें। -- डॉ. कुदसिया अंजुम, प्रधानाचार्य, श्री हिन्दू कन्या इंटर कॉलेज।

शिफा- फोटो : SAHARANPUR

साक्षी- फोटो : SAHARANPUR

काजल- फोटो : SAHARANPUR

-- श्री हिंदू कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यशाला में में छात्रा को पुरस्कृत करते साहित्यकार डॉ- फोटो : SAHARANPUR

-- श्री हिंदू कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यशाला में में छात्राओं को माहिया लिखना सिखाते साहित- फोटो : SAHARANPUR

-- श्री हिंदू कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यशाला में में छात्राओं को दोहा लिखना सिखाते साहित्य- फोटो : SAHARANPUR

-- श्री हिंदू कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यशाला में छात्रा को पुरस्कृत करते साहित्यकार विनोद - फोटो : SAHARANPUR

-- श्री हिंदू कन्या इंटर कॉलेज आयोजित कार्यशाला में विचार रखतीं प्रधानाचार्या डॉ कुदसिया अंजुम ।- फोटो : SAHARANPUR

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें