प्रधानाचार्य व शिक्षकों ने मौके पर ही खाने की जांच की तो उसमें कीडे़ निकलने के साथ ही गुणवत्ता भी निम्न स्तर की पाई गई। उन्होंने खाना डिलीवर करने वाले वाहन चालक के समक्ष नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह का भोजन का सेवन उनके विद्यालय के बच्चे नहीं करेंगे तथा संबंधित कार्यदाई संस्था की शिकायत उच्चाधिकारियों को भी की जाएगी।
खाने में कीड़े निकलने की सूचना पर अभिभावक ब्रजपाल सिंह, महेंद्र सिंह यशपाल सिंह कटारिया, कर्मवीर सिंह, मांगेराम, संदीप कुमार, मोनू कुमार आदि ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब होने के साथ ही बच्चों को दूषित खाना परोसा जाना घोर लापरवाही है।
प्रधानाचार्य डॉ. नरेशचंद चमौली ने बताया, कि उन्होंने कार्यदाई संस्था के पदाधिकारियों को काॅलेज बुलवाया है। तब तक खाने को बंद करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी विभागीय अधिकारियों को भी दी गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डॉ. रोहित वालिया ने बताया कि कीड़े युक्त भोजन करने से उल्टी दस्त, पेट खराब होना तथा कई बार गंभीर बीमारी फूड प्वाइजनिंग आदि हो जाती है।
बदायूं की यूनाइटेड विकास समिति के पास है मिड-डे मिल की व्यवस्था का टेंडर
कक्षा एक से लेकर कक्षा आठ तक के बच्चों को शिक्षा के साथ ही विद्यालयों में भोजन की व्यवस्था भी सरकार द्वारा की गई है। प्रतिदिन निर्धारित मेन्यू के अनुसार एनजीओं के माध्यम से मिड-डे मील का पका पकाया भोजन छात्रों को परोसा जाता है।
महंगी इंटर कॉलेज में खाना बनाने का टेंडर बदायूं की यूनाइटेड विकास समिति के नाम पर है तथा गंगोह ब्लाॅक के करीब 11 स्कूल काॅलेजों में भोजन भिजवाने का उत्तरदायित्व भी इसी समिति का है।