एसटीएफ ने दस्तावेज लेकर शुरू की जांच
सहारनपुर। भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट में सेंधमारी कर मतदाता पहचान पत्र बनाने के मामले में एसटीएफ ने दस्तावेज कब्जे लेकर जांच शुरू कर दी है। फरार चल दो आरोपियों की गिरफ्तारी एसटीएफ ही करेगी। शासन के निर्देशानुसार साइबर थाना पुलिस ने जांच बंद कर दी थी। इस मामले में 11 आरोपी जेल जा चुके हैं।
बुधवार शाम मेरठ से सीओ एसटीएफ देवेंद्र टीम के साथ साइबर थाने पहुंचे और एफआईआर की कॉपी व जांच से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। फरार आरोपी मध्य प्रदेश के मुरैना निवासी हरिओम उर्फ हर्षा और विकेश की गिरफ्तार एसटीएफ करेगी। एसपी सिटी राजेश कुमार ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार जांच एसटीएफ को स्थानांतरित की गई है। मेरठ से एसटीएफ के सीओ देवेंद्र और एक इंस्पेक्टर आए थे।
यह था मामला
साइबर थाना पुलिस ने 12 अगस्त की रात नकुड़ क्षेत्र के गांव मच्छरहेड़ी निवासी विपुल सैनी को गिरफ्तार किया, जो जनसेवा केंद्र चलाता था और मतदाता पहचानपत्र भी बना रहा था। वह दिल्ली निवासी अरमान मलिक से हजारों मतदाता पहचानपत्र बनवा चुका है। इसके बाद कमल विहार निवासी आदित्य खत्री, आजादपुर निवासी आशीष जैन, अमन विहार निवासी अरमान मलिक उर्फ मोहम्मद नियाज आलम और सराय बस्ती दिल्ली निवासी नितिन, दीपक मेहता उर्फ टेक्निकल मेहता व उसका भाई संजीव मेहता निवासी जिला बारां राजस्थान, हरिओम के साथी आकाश व अजय कुशवाह जेल जा चुके हैं। इनमें नितिन और आदित्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय में संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्य कर चुके हैं, जिन्होंने यूजर आईडी और पासवर्ड अन्य आरोपियों को बांटे थे।