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कुछ इस तरह से चर्चा में आई थी भीम आर्मी

Fri, 09 Jun 2017 12:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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लगाए गए बोर्ड के साथ चंद्रशेखर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में दलित उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भीम आर्मी का गठन हुआ था। विगत दो साल में दलितों के बीच इसने अपनी पहचान बनाई। 
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2015 में घडकौली गांव में  ‘द ग्रेट चमार’ का बोर्ड लगाकर सुर्खियों में आया और इसके बाद गांव में संगठन के लोगों के बवाल के बाद चंद्रशेखर का चेहरा सामने आया था। 

भीम आर्मी का नेटवर्क तेजी से गांवों में फैला और राजनीतिक दलों के समानांतर एक जनाधार वाला सामाजिक संगठन खड़ा कर दिया। दरअसल, छुटमलपुर निवासी भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण ने दलितों के उत्पीड़न से लड़ने के लिए युवाओं का एक संगठन खड़ा किया। 
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उसने अगड़ी जातियों के खिलाफ दलितों के मन में जहर भरना शुरू किया। पांच मई को शब्बीरपुर हिंसा के बाद यह संगठन सक्रिय होकर आक्रामक हो गया। जो आज यहां तक पहुंच गया।
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उधर, भीम आर्मी के संस्थापक और 12 हजार रूपये का इनामी  चन्द्रशेखर उर्फ रावण पुत्र गोरधन निवासी गली नं0-2 हरिजन कालोनी कस्बा छुटमलपुर थाना फतेहपुर पर कोतवाली देहात में मुकदमा अपराध संख्या 159/17 में धारा 147, 148, 335, 427,  मुकदमा अपराध संख्या 160/17 धारा 147, 148, 335, 427, मुकदमा अपराध संख्या 162/17 धारा 147, 148, 149, 307, 332, 353, 436, 427 भादवि, एवं 07 क्रिमिनल लॉ एक्ट एक्ट व 3/4 लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम में  वांछित चल रहा था। एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि भीम आर्मी का संस्थापक चन्द्रशेखर दलितों का हितैषी बनकर हिंसक वारदातों को अंजाम देता रहा था।
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