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स्मार्ट सिटी योजना ने पकड़ी गति, सड़कों का हुआ सुंदरीकरण

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सहारनपुर। बीते 35 साल में शहर में काफी कुछ बदलाव आया है। एक ओर जहां शहर का दायरा बढ़कर दोगुने से अधिक हो गया, वहीं विकास कार्यों ने शहर की सूरत भी बदली है। पहले नगर पालिका से नगर निगम बना। निगम बोर्ड चार साल पूरे भी कर चुका है। इसके अलावा स्मार्ट सिटी में चयन हुआ, जिसकी परियोजनाएं अब शुरू हो रही हैं। अमर उजाला 35 साल से शहर के विकास का गवाह बना है।
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सहारनपुर ऐतिहासिक शहर है, जिसका बेस रेलवे लाइन से उत्तर दिशा में रहा है। बीते करीब तीन दशक में शहर दिल्ली रोड की ओर सर्वाधिक बढ़ा है। मनानी फाटक तक कॉलोनियां काटी जा चुकी हैं। आज शहर के दो रूप हैं, जिनमें एक पुराना शहर और दूसरा नया शहर कहलाने लगा है। बेशक सहारनपुर में विकास का पहिया धीरे घूमा मगर सुधार आया है। चौड़ी और सुंदर सड़कें, मॉल्स, शॉपिंग कॉम्पलेक्स, होटल और बैंक्वेट हॉल बनने से शहर और शहरवासियों का स्तर सुधरा है।
स्मार्ट सिटी योजना में यह हुआ कार्य
स्मार्ट सिटी योजना के तहत नगर निगम परिसर में आईसीसीसी (इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर) का भवन पूरी तरह तैयार कर दिया गया है। जिसका ट्रायल हो चुका है। शहर में 900 जगहों पर सीसीटीवी लगाए गए हैं। ट्रैफिक सिग्नल का कार्य चल रहा है। इसके अलावा घंटाघर से कोर्ट रोड पुल और रेलवे स्टेशन तक स्मार्ट रोड का कार्य चल रहा है।
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32 गांवों की बदली सूरत
वर्ष 2010 में नगर निगम के गठन के दौरान 32 गांवों को शहर में शामिल किया गया था। इन गांवों में 2010 से पहले सूरज ढलते ही अंधेरा छा जाता था, आज यह गांव दूधिया रोशनी से जगमग रहते हैं, क्योंकि नगर निगम ने इनमें एलईडी स्ट्रीट लाइटों के साथ ही हाईमास्ट लाइटें भी दी हैं। सफाई व्यवस्था के लिए सफाईकर्मी रखे गए हैं। सड़क और नाली व्यवस्था भी दुरुस्त हुई है।
स्वच्छता में बढ़े कदम
नगर निगम क्षेत्र में तीन साल पहले तक 148 कूड़ाघर थे, जिन्हें कम करके नगर निगम ने 38 पर ला दिया है। कूड़ा घर कम करने के पीछे मकसद शहर को कचरा फ्री बनाना है, जिससे जगह-जगह कचरा नजर ना आए। इसके अलावा कचरे के निस्तारण के लिए दस एमआरएफ (मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर खुले हैं, जहां कचरे को अलग-अलग किया जाता है। कचरा निस्तारण के लिए बेहट रोड पर करीब 60 बीघा भूमि खरीदी गई थी, जिस पर काम चल रहा है।
इन योजनाओं पर चल रहा काम
शहर के कुछ ही हिस्से में पहले से सीवर लाइन थी, जिसमें से ज्यादातर लाइनें बैठ चुकी थी। बीते दो साल से अमृत योजना के तहत 59 किलोमीटर की सीवर लाइन डाली जा रही है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत चिह्नित किए गए एबीडी (एरिया बेस्ड डेवलपमेंट) क्षेत्र में निगम के पुराने 21 वार्ड शामिल हैं। यानी नई कॉलोनी या गांव नहीं हैं। इनमें करीब 100 किलोमीटर की सीवर लाइन डाली जानी है, जिसका बजट करीब 91.14 करोड़ रुपये का है। उधर, नौ हजार घरों में पेयजल के लिए पाइपलान बिछा दी गई है।
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जनपद की 35 साल की उपलब्धियां
-सहारनपुर कमिश्नरी बना।
-सहारनपुर शहर नगर पालिका से नगर निगम बना।
-राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना।
-राजकीय विश्वविद्यालय का शिलान्यास।
-स्पोर्ट्स कॉलेज मिला।
-सर्किट हाउस बना।
-स्पोर्ट्स स्टेडियम बना।
-विकास प्राधिकरण की स्थापना।
-स्टेडियम को सात करोड़ रुपये का सिंथेटिक ट्रैक मिला।
-जनपद ओडीएफ घोषित हुआ।
-करीब 350 करोड़ की लागत से शिवधाम बन रहा।
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