सहारनपुर। साहब, हमें छह महीने से मानदेय नहीं मिला है। मानदेय जारी करने के बदले में दो-दो हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। यह आरोप डूडा (जिला नगरीय विकास अभिकरण) के तहत पानी के नमूनों की जांच के लिए रखी गईं महिलाओं ने डूडा के प्रभारी/अपर नगरायुक्त राजेश यादव के समक्ष जनसुनवाई में लगाए।
महानगर में नागरिकों को मुहैया कराए जा रहे पेयजल की जांच के लिए समूह की महिलाओं को नियुक्त किया गया है। महानगर में करीब 60 महिलाएं लगाई गईं हैं। जिनको पानी की जांच के लिए फिलहाल 40 वार्ड दिए गए हैं। महिलाएं सुबह-सुबह घर-घर जाकर पानी के नमूने लेकर किट के माध्यम से पानी की जांच करतीं हैं। जांच में पानी में क्लोरिन की मात्रा आदि की जांच होती है।
नगर निगम पहुंची महिलाओं ने बताया कि एक महिला को प्रतिदिन 10 नमूनों की जांच करनी होती है, जिसकी रिपोर्ट हर दिन सबमिट करनी होती है। दस जांच के लिए प्रत्येक महिला को 361 रुपये देना तय है। उन्होंने बताया कि वह मार्च 2024 से कार्यरत हैं। बीते छह महीने से उनका मानदेय नहीं आया है। डूडा के कर्मचारी उन्हें चक्कर कटवा रहे हैं। मानदेय जारी करने के नाम पर कुछ महिलाओं से दो-दो हजार रुपये की मांग भी की गई है। इस पर डूडा के प्रभारी/अपर नगरायुक्त राजेश यादव ने तुरंत संबंधित कर्मचारी को फोन कर फाइल के साथ तलब किया।