सहारनपुर। प्रभु जी का परिवार के तत्वावधान में चल रहे अष्टोत्तर शत्, नवकुंडीय यज्ञ, श्रीमद्भागवत कथा और गऊ पूजन में चौथे दिन जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ी व्यथा डर है। मनुष्य चिंताओं से घिरा हुआ है और श्रीमद्भागवत कथा इसी डर को खत्म करने के साथ ही परमात्मा से मनुष्य को मिलाती है।
साऊथ सिटी में आयोजित नौ दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम में मंगलवार को जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। प्रभु जी का परिवार के अध्यक्ष पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय और यज्ञाचार्य संजीव शास्त्री ने माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया। इससे पूर्व स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने यज्ञशाला, कुटिया, गऊ परिक्रमा व भंडारा स्थल का भ्रमण कर प्रभु जी के परिवार को साधुवाद दिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जिस तरह से श्रीमद्भागवत कथा के साथ 18 महापुराण, 108 श्रीमद भागवत के मूलपाठ चल रहे हैं, वह अद्भुत है और सहारनपुर के लिए यह सौभाग्य की बात है।
इसके साथ ही कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया। कथा व्यास जगतगुरु स्वामी राघवाचार्य महाराज ने कहा सप्तम स्कंद में भगवान के परम भक्त प्रह्लाद का वर्णन आता है, इसमें भक्त प्रहलाद भगवान से कहते कि मुझे ब्रह्मा बना दो। प्रहलाद की भक्ति ऐसी थी कि भगवान उन्हें ब्रह्मा बना देते, लेकिन जब उनसे भगवान ने कुछ मांगने के लिए कहा तो प्रहलाद बोले कि हे प्रभु आपकी भक्ति करके अगर आपसे कोई कुछ मांगा जाए तो वह भक्ति नहीं व्यापार है। इस मौके पर जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय, महापौर संजीव वालिया, पद्मश्री भारत भूषण, रानी देव लता, वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी, पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा को प्रभु जी का परिवार ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इन सभी ने संतों का माल्यार्पण का आशीर्वाद लिया। इस दौरान यजमान और प्रभु जी का परिवार के सदस्य मौजूद रहे।
धर्म के अनुरूप कार्य करो: डीएम
सहारनपुर। जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय ने स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज और कथा वाचक राघवाचार्य महाराज का समस्त सहारनपुर वासियों की ओर से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि गीता का ज्ञान जितना मुझे समझ आता है, उसका सार यही है कि जहां भी जाओ वहां धर्म के अनुरूप ही काम करो।
हर व्यक्ति करे श्रीमद्भागवत अनुसरण: भूषण
सहारनपुर। योगाचार्य पद्मश्री भारत भूषण ने अवधेशानंद गिरि महाराज का स्वागत किया। उन्होंने कहा जीवन में हर व्यक्ति को श्रीमद्भागवत का अनुसरण करना चाहिए। श्रीमद्भागवत एक ऐसा ग्रंथ है, जिसके अनुसरण से मनुष्य जीवन में आने वाली कठिनाई स्वयं ही दूर हो जाती हैं।
धर्म के साथ करें अच्छे कर्म और रहें नर्म: मिगलानी
सहारनपुर। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी ने कहा क्रोध की वजह से मनुष्य के दिमाग की नस फट सकती है। हाई ब्लड़ प्रेशर होने के साथ हार्टअटैक हो सकता है। हमें अपने आचार-विचार और विहार अच्छा रखना चाहिए। इसके साथ ही स्वच्छता को अपनाते हुए बीमारियों से दूर रहें और रोजाना टहलने की आदत डालें। भारतीय संस्कृति के अनुसार ही जीवन यापन करें। पश्चिमी सभ्यता से दूर रहें।
साउथ सिटी में अष्टोत्तर शत् श्रीमद भागवत कथा में स्वामी अवधेशानंद गिरी का स्वागत करते योगाचार्य- फोटो : SAHARANPUR
साउथ सिटी में अष्टोत्तर शत् श्रीमद भागवत कथा में भाग लेते श्रद्घालु- फोटो : SAHARANPUR
साउथ सिटी में अष्टोत्तर शत् श्रीमद भागवत कथा में यज्ञशाला का भ्रमण करते स्वामी अवधेशानंद गिरी- फोटो : SAHARANPUR