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लीवर और पित्त संबंधी रोगों के निदान की तकनीक साझा की

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सरसावा(सहारनपुर)। राजकीय मेडिकल कॉलेज में लीवर और पित्त संस्थान दिल्ली के वरिष्ठ चिकित्सकों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सेमिनार का आयोजन किया। इसमें मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने दिल्ली संस्थान के चिकित्सकों से इस क्षेत्र की बीमारियों तथा निवारण की नई तकनीकों को लेकर संवाद भी किया।
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शुक्रवार को अंबाला रोड स्थित शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक ई सेमिनार का आयोजन हुआ। कॉलेज में बायोकेमिस्ट्री के प्रोफेसर तथा आईएलबीएस के नोडल डॉ. राकेश शर्मा ने इस विषय में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. शर्मा ने बताया कि दिल्ली स्थित यकृत एवं पित्त संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रकाश बंसल ने ई क्लासेज के माध्यम से बताया कि खानपान में विकृति बढ़ने से लीवर और पित्त संबंधी रोगों में इजाफा हो रहा है। गॉल ब्लेडर यानि पित्त की थैली में पथरी का कारण भी अनुचित खानपान ही है जिसका स्टेपिन विधि द्वारा इलाज किया जा सकता है, लेकिन स्टेपिन विधि का प्रयोग डॉक्टर की सलाह से एक निश्चित समय तक ही किया जा सकता है। अधिक मात्रा में प्रयोग करने से शरीर पर इसका व्यापक दुष्प्रभाव पड़ता है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते हुए डॉ. प्रकाश बंसल ने बताया कि यकृत तथा पित्त संबंधी रोगों के निदान के लिए नित नई तकनीक सामने आ रही है, लेकिन रोग की सावधानी ही उसका सबसे बड़ा बचाव है। ई टेलीकास्ट के समय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद, सीएमएस डॉ. संजीव कुमार, डॉ. मनोज कुमार, माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा सहित 14 चिकित्सकों एवं डिमांसट्रेटर, ट्यूटर एवं स्टाफ मौजूद रहा।
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