सहारनपुर। जीआईएस सर्वे को लेकर हर वर्ग में आक्रोश है। जनप्रतिनिधियों से लेकर आमजन तक जीआईएस सर्वे के बाद लगाए गए टैक्स के विरोध में लामबंद है। सीनियर सिटीजन और पेंशनर्स एसोसिएशन भी जीआईएस सर्वे पर आपत्ति जता रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि टैक्स बढ़ रहा है तो निगम को सुविधाएं भी बढ़ानी चाहिए।
वरिष्ठ नागरिकों ने जीआईएस सर्वे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सर्वे को सही ढंग से लागू नहीं किया गया है। प्राइवेट कंपनी से सर्वे कराया गया है। उन्होंने कहा कि एक घर ऐसा है, जिसमें दो बुजुर्ग दंपती रहते हैं तो एक घर ऐसा है जिसमें पांच या छह लोग रहते हैं। नगर निगम को टैक्स लगाते समय भी इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि घर में रहने वाले सदस्य पानी का कितना इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने सरकार और जनप्रतिनिधियों से टैक्स को कम कराने के लिए आवाज उठाने की मांग है।
- बोले सीनियर सिटीजन
नगर निगम को महंगाई आदि के आंकड़ों को देखते हुए टैक्स बढ़ाना चाहिए था। जीआईएस सर्वे के बाद जो टैक्स आया है वह गलत है। राजा का कार्य प्रजा की सेवा करना है। सरकार को चाहिए कि वह टैक्स को कम करें।
- सुरेंद्र कुमार, जिलाध्यक्ष गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन
अधिकारियों की लापरवाही के चलते अव्यवस्था है। सर्वे सिस्टम से नहीं किया गया, जिसका खामियाजा आम जनता को उठाना पड़ रहा है। सरकार इस पर कदम उठाए और परेशान आम आदमी को राहत देने का काम करें।
- केएल अरोड़ा, संस्थापक सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन
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जीआईएस सर्वे से व्यापारी से लेकर आम जनता को नुकसान है। नगर निगम देखें कि एक घर में रहने वाले लोग कितने संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं। सीनियर सिटीजन के घर में ज्यादातर दो सदस्य रहते हैं। भले ही उनका घर 100 या 400 गज का हो। निगम को संसाधन के दोहन के अनुपात में टैक्स लगाना चाहिए।
- संदीप गुप्ता, कोषाध्यक्ष सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन
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- नगर निगम को अधिक टैक्स वसूलने से पहले सुविधाओं को भी बढ़ाना चाहिए। कई कॉलोनियां में सीवर सिस्टम नहीं है। सीनियर सिटीजन सर्वे के विरोध में हैं। टैक्स को संशोधित करना चाहिए।
-केडी गौतम, कोषाध्यक्ष गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन