सहारनपुर के गांव खुर्द में बृहस्पतिवार की रात बारिश की वजह से एक मकान भरभराकर गिर गया, जिसमें दबने से परिवार के कई लोग घायल हो गए। मगर इसके साथ ही शहर के जर्जर भवनों की स्थिति पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
दरअसल, शहर के भीतर 200 से अधिक पुराने और जर्जर मकान हैं, जिनमें रह रहे सौ से अधिक परिवारों की जिंदगी चौबीसों घंटे खतरे में है। कई साल से लगातार जर्जर भवन गिरते रहे हैं, जिनमें दबने से कई लोग अभी तक अपनी जान गवा चुके हैं।
इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग जर्जर भवनों में जमे हुए हैं। सहारनपुर एतिहासिक शहर है, जिसमें मुगलों और अंग्रेजों के जमाने के सैकड़ों भवन आज भी मौजूद हैं। पुराने शहर में हर दस कदम पर सौ से अधिक वर्ष पुराने भवन मिल जाएंगे।
पुराने और जर्जर होने की वजह से यह भवन लगातार गिर रहे हैं। दो साल पहले हिरनमारान में ऐसा ही पुराना भवन गिरने से नीचे गोदाम में काम कर रहे मजदूर दब गए थे।
करीब तीन साल नगर कोतवाली क्षेत्र में भारी बारिश के बीच परिवार मकान खाली कर रहा था। इसमें मां और बेटे की दबकर मौत हो गई थी। लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए नगर निगम ने जर्जर मकानों को ध्वस्त कराने का निर्णय लिया था।
इसके लिए जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे, जिनकी संख्या करीब 160 थी। मगर भवनों को चिह्नित करने से आगे नगर निगम कोई कार्रवाई नहीं कर सका है। आलम यह है कि आज भी सौ से अधिक परिवार इन जर्जर भवनों में रह रहे हैं।
पुराने शहर में अनेक जर्जर मकान हैं। इनमें कुछ मकान तीन से चार मंजिला तक हैं, जिनकी वजह से पड़ोसियों और उनके मकानों को भी खतरा बना हुआ है। ऐसे लोग हर साल नगर निगम और डीएम को ज्ञापन देकर अपनी जान की सुरक्षा की मांग कर चुके हैं।
शहर में जर्जर मकानों का मामला मेरे संज्ञान में है। जिन भवनों के मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं, उनको हम अभी नहीं छेड़ेंगे। मगर बाकी मकान स्वामियों को नोटिस भेजकर अपने मकान ध्वस्त करने को कहा जाएगा। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो निगम अपने स्तर से कार्रवाई करेगा।
- गौरव वर्मा, नगरायुक्त।