कृषि वैज्ञानिकों ने शुक्रवार को जनपद के कई गांवों में बासमती धान की फसल का निरीक्षण किया। उन्हें पूसा नंबर-1 बासमती के कई खेतों में जीवाणु झुलसा और ब्लास्ट रोग का प्रकोप दिखाई दिया। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आई के कुशवाह के साथ मेरठ स्थित बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान की टीम ने जनपद के विभिन्न गांवों में बासमती धान के खेतों का निरीक्षण किया।
बीईडीएफ (बासमती एक्सपोर्ट डवलपमेंट फाउंडेशन) के प्रधान वैज्ञानिक डॉक्टर रितेश शर्मा ने निरीक्षण के बाद बताया कि गांव टिकरोल, नन्दी फिरोजपुर और मदनूकी में बासमती धान की बहुत बढ़िया फसल खड़ी है। मौसम के अनुकूल होने के कारण अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि विदेशों में भारतीय बासमती की मांग लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष निर्यात बढ़ने की उम्मीद के चलते किसानों को बासमती का अच्छा मूल्य मिलने की संभावना है।
डॉक्टर आईके कुशवाह ने बताया कि निरीक्षण में पूसा नंबर-1 प्रजाति में जीवाणु झुलसा और ब्लास्ट रोग का प्रकोप दिखाई दिया है। इस मौसम में इन रोगों के बढ़ने की आशंका है। इसलिए किसान अपनी फसल का लगातार निरीक्षण करते रहे। खेतों में पानी भरकर रखने के बजाए खेत में सिर्फ नमी बनाकर रखा जाए। जरूरत पड़ने पर कीटनाशकों को छिड़काव भी किया जा सकता है। इस दौरान बीईडीएफ के वैज्ञानिक अधिकारी नेत्रपाल शर्मा के साथ ही जनपद के प्रगतिशील किसान बसंत कुमार, सेठपाल नंदी, विनोद कुमार, सतवीर सिंह आदि भी मौजूद रहे।