बागपत/रटौल। खैला गांव के हजारीलाल मेमोरियल कॉलेज पर ताला लटक गया है। क्योंकि वहां के शिक्षकों व प्रबंधन में खींचतान होने के कारण अन्य कॉलेजों से संंबद्ध कर दिया गया है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई चौपट हो रही है, जबकि बोर्ड की परीक्षा भी नजदीक आ गई है। काॅलेज में हाईस्कूल में 17 और इंटरमीडिएट में 42 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।
खैला गांव का हजारीलाल मेमोरियल कॉलेज जंग का अखाड़ा बन गया था। शिक्षकों ने प्रबंधक पर आरोप लगाते हुए धरना दिया तो प्रबंधक ने भी बच्चों को कॉलेज से भगाने, फीस जमा न करने के मामले में एक शिक्षक को निलंबित कर दिया था। इस विवाद के बाद डीआईओएस ने चारों शिक्षकों को बागपत, तुगाना, बामनौली व टांडा गांव के कालेजों में संबद्ध कर दिया। इसके बाद कालेज पर ताला लटक गया। कॉलेज में कक्षा छह से लेकर 12 तक के करीब 350 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं। मगर अब उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों व डीएम से समस्या का समाधान कराकर शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग की है, ताकि बच्चों की ठीक से पढ़ाई हो सके।
बोर्ड परीक्षा पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
प्रबंध समिति व शिक्षकों की लड़ाई में विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट के बादल छाने लगे हैं। दोनों पक्ष में खींचतान चल रहा है और इसके कारण कॉलेज पर एक माह से ताला लटका हुआ है। ताला लटकने के कारण बच्चों की पढ़ाई भी बंद हो गई है। ऐसे में उनके सामने बोर्ड की परीक्षा तैयारी करने में परेशानी हो रही है। जब शिक्षक नहीं पढ़ाएंगे तो वह तैयारी कैसे करेंगे और बच्चों को काफी परेशानी हो रही है।
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विवाद के बाद दूसरे स्कूलों में कराएंगे बच्चों का दाखिला
ग्रामीणों ने कहा कि नए शिक्षा सत्र से बच्चों का दाखिला किसी दूसरे स्कूल में कराया जाएगा, क्योंकि कॉलेज में इसी तरह विवाद चलता रहेगा। यह विवाद कोई नया नहीं है। इससे पहले भी विवाद हो चुका है। कॉलेज में भी प्रबंध समिति को कोई शिक्षक नहीं मिल रहा है। ऐसे में कम पढ़े लिखे शिक्षकों को रखा जाएगा, जिससे वह विद्यार्थियों को सही से नहीं पढ़ा सकेंगे।
- शिक्षकों व प्रबंधन के बीच लड़ाई के कारण एक माह से कॉलेज पर ताला लटका हुआ है। ऐसे में मेरी पढ़ाई बाधित हो रही है और इस बार 12वीं की परीक्षा देनी है। कॉलेज नहीं जाने के कारण परीक्षा की तैयारी नहीं हो पा रही है।
वोराक्षी, खैला
- कॉलेज में रोजाना जाती हूं, मगर गेट पर ताला लगा होने के कारण वापस आना पड़ता है। पढ़ाई सही से नहीं होने के कारण 12वीं की परीक्षा को लेकर डर सताने लगा है। क्योंकि शिक्षक न आने के कारण पढ़ाई पर सकट गहराता जा रहा है और पढ़ाई पर असर पड़ रहा।
शीतल, मंसूरपुर
- बोर्ड परीक्षा फरवरी में होनी है और ऐसे में कॉलेज बंद होने के कारण बोर्ड परीक्षा की तैयारी भी नहीं हो पा रही है। शिक्षकों व प्रबंध समिति की लड़ाई में मेरी दसवीं की परीक्षा पर अंधकार के बादल छाने लगे है।
शिवम, खैला
- मेरी कक्षा दस की पढ़ाई बाधित हो रही है, क्योंकि एक माह से पढ़ाई नहीं हो रही है। ऐसे में विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट के बादल छाने लगे हैं। बोर्ड परीक्षा की तैयारी तक नहीं हो रही है। प्रशासन भी ध्यान नहीं दे रहा है।
तन्नू, खैला
- शिक्षकों व प्रबंध समिति की आपसी लड़ाई में विद्यार्थियों का भविष्य खराब हो रहा है। जब कॉलेज में शिक्षक नहीं होंगे तो पढ़ाई कैसे होगी। इस बार दसवीं की परीक्षा है और जब पढ़ाई नहीं होगी तो कैसे बोर्ड की परीक्षा दे सकेंगे।
विशाल हुड्डा, अभिभावक मंसूरपुर
- एक माह से कॉलेज बंद है और पढ़ाई नहीं हो रही है। शिक्षकों को भी दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया है। यहां कोई शिक्षक नहीं है। यदि यही विवाद चलता रहा तो दूसरे स्कूल में बेटी काजल का दाखिला कराना पड़ेगा।
लोकेश, अभिभावक खैला
- मेरा बेटा अभिमन्यु कक्षा दस में पढ़ता है। बेटा स्कूल भी नहीं जा पा रहा है और ऐसे मेें पढ़ाई बाधित हो रही है। शिक्षा विभाग भी शिक्षकों व प्रबंध समिति के विवाद को खत्म नहीं करा पा रहा है। अब उनके सामने किसी दूसरे स्कूल में दाखिला कराने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं है।
मितलेश, अभिभावक लहचौड़ा
- बेटा लविश कक्षा दस में पढ़ता है और अब फरवरी में बोर्ड परीक्षा होनी है। जब कॉलेज में पढ़ाई नहीं होगी तो कैसे बोर्ड परीक्षा पास कर सकेगा। पढ़ाई नहीं होने के कारण भविष्य पर संकट छाया हुआ है और कॉलेज एक माह से बंद पड़ा है।
सुनील, अभिभावक खैला
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वर्जन
- एक शिक्षक ने कॉलेज का माहौल खराब कर दिया था और बच्चों को कॉलेज से भगा देता था। जल्द ही शिक्षकों को रखकर पढ़ाई शुरू कराई जाएगी, ताकि बच्चों का कोर्स समय से शुरू कराया जा सके। इसके लिए प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
राजेंद्र भाटी, प्रबंधक
कालेज में आए दिन विवाद होने के कारण गलत संदेश जा रहा था। इस कारण शिक्षकों को अन्य जगह संबद्ध कर दिया गया। बच्चों का कोर्स पूरा कराने के लिए फिलहाल शिक्षकों की अस्थायी व्यवस्था कराई जाएगी।
धर्मेंद्र सक्सेना, डीआईओएस