सहारनपुर। बेशक चिकित्सा व्यवसाय बन चुकी है, लेकिन अब भी सरकारी के साथ ही कुछ निजी डॉक्टर ऐसे भी हैं, जो अपने काम में सेवा भाव भी रखते हैं। डॉक्टर्स-डे पर ऐसे डॉक्टरों का जिक्र करना इसलिए भी जरूरी है, ताकि वह और ऊर्जा के साथ अपने काम को अंजाम दे सकें। कुछ डाक्टर्स ऐसे भी हैं जिन्होंने कोरोना की दूसरी लहर में जब लोग खौफ से घरों से निकलना तक उचित नहीं समझ रहे थे, तब इन डॉक्टरों ने अपनी और अपनों की जिंदगी की परवाह न करते हुए कोरोना संक्रमण से जूझ रहे लोगों को बचाने का काम किया। पेश है ऐसे ही कुछ डॉक्टरों की कहानी...
शुगर के मरीज होने के बावजूद निभाई जिम्मेदारी
एसबीडी जिला अस्पताल में फिजीशियन के तौर पर सेवा दे रहे डॉ. बीएस सोढ़ी कोरोना की पहली और दूसरी लहर में सहारनपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी रहे हैं। उन्होंने कोरोना और कोरोना मरीजों को बहुत नजदीक से देखा और समझा। खुद मधुमेह जैसी बीमारी से ग्रसित होने के बावजूद वह कोरोना के दिनों में 24 घंटे दौड़ते रहे।
जान की परवाह न कर सैकड़ों जिंदगियां बचाईं
एसबीडी जिला अस्पताल के छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. जी रहमान ने कोरोना की दूसरी लहर में सैकड़ों जिंदगी बर्चाइं। उन्होंने गंभीर संक्रमितों का इलाज किया। उन्होंने आत्मीय रूप से मरीजों से जुड़कर बीमारी से लड़ने के लिए उनके भीतर साहस भी जगाया।
बिना अवकाश लिए की मरीजों की सेवा
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. अनिल वोहरा कोरोना की पहली और दूसरी लहर में मरीजों का बड़ा सहारा रहे। उन्होंने आइसोलेशन वार्ड में जाकर मरीजों का इलाज किया। डॉ. वोहरा ने बिना अवकाश लिए अपनी ड्यूटी को अंजाम दिया।
जिम्मेदारी निभाते हुए खुद संक्रमित हुए
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसावा के प्रभारी डॉ. राजेश ने कोरोना काल में मरीजों की जिंदगियां बचाने का कार्य किया। उन्होंने सीएचसी पर आने वाले संदिग्ध मरीजों की जांच कराने के साथ ही संक्रमित पाए जाने पर उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में भर्ती कराने का भी काम किया। डॉ. राजेश खुद भी संक्रमित हुए थे, लेकिन ठीक होने के बाद फिर से सेवा में डट गए।
टेली मेडिसिन के जरिए की मरीजों की सेवा
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी ने कोरोना की दूसरी लहर में टेलीमेडिसिन सेवा चलाकर अनेक मरीजों को मुफ्त परामर्श दिया। इतना ही नहीं, कोरोना की वजह से लोग आर्थिक तंगी में आ गए, जिसके बाद उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से परामर्श शुल्क लेना बंद कर दिया और आज भी वह वरिष्ठ नागरिकों से शुल्क नहीं ले रहे हैं।
ओपन ओपीडी चलाकर की सेवा
डॉ. सतीश कुमार कोरोना की दूसरी लहर में जिला अस्पताल में फिजीशियन के तौर पर तैनात रहे। कोरोना में ओपीडी सेवा बंद कर दी गई थी। ऐसे में डॉ. सतीश कुमार ने 60 साल की उम्र पार करने के बावजूद जिला अस्पताल में ओपन ओपीडी चलाकर अपनी जिंदगी की परवाह ना करते हुए मरीजों का इलाज किया।
नेत्रदान व देहदान के लिए कर रहे प्रेरित
डॉ. अमित गर्ग ने कोरोना काल में अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। अब वह लोगों को नेत्रदान व देहदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जिससे जरूरतमंदों के काम आ सके। वह अभी तक 22 लोगों से नेत्रदान और एक व्यक्ति से देहदान करा चुके हैं। उनका मानना है कि एक मनुष्य को दूसरे मनुष्य की परवाह करनी चाहिए तभी हम सामाजिक कहला सकते हैं।
डॉ. सतीश कुमार- फोटो : SAHARANPUR
डॉ. राजेश- फोटो : SAHARANPUR
डॉ. अनिल वोहरा- फोटो : SAHARANPUR
डॉ. संजीव मिगलानी- फोटो : SAHARANPUR