सहारनपुर। गांव सकतपुर में उत्खनन के कार्य में जुटी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम के साथ कुछ अहम चीजें लगी हैं। इनमें हड्डियों के गले हुए टुकड़े और कोयले के कुछ टुकड़े शामिल हैं, जिन्हें लेकर पुरातत्व विभाग के अधिकारी खासे उत्साहित हैं। जल्द ही इन टुकड़ों को कार्बन-डेटिंग के लिए लैब भेजा जाएगा। हड्डियों की कार्बन-डेटिंग होने के बाद यह पता चल सकेगा कि क्षेत्र में कौन सी सभ्यता कभी रही होगी। अभी तक हड़प्पा कालीन सभ्यता होने के सुबूत मिलते रहे हैं।
पिछले वर्ष यानी 2016 में रामपुर मनिहारान के गांव सकतपुर के एक खेत में ईंट बनाने के लिए मिट्टी की खुदाई कर रहे मजदूरों को कई फुट नीचे से धातु के कुछ टुकड़े मिले थे। मामला चर्चा में आने के बाद तत्कालीन एसडीएम ने पुलिस को मौके पर भेजकर खेत को संरक्षित कराया था। साथ ही पुरातत्व विभाग को इसकी जानकारी दी थी। पुरातत्व विभाग की टीम ने धातु के टुकड़ों को कुल्हाड़ी के हिस्से बताया था, जिन्हें हड़प्पा काल का माना गया था। यानी करीब चार से साढ़े चार हजार साल पुराना। ग्रामीणों को खेत से कई बार पुराने सिक्के और मृदभांड भी मिलते रहे हैं।
ऐसे में यह साइट पुरातत्व विभाग की नजर में थी। करीब डेढ़ महीने पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (आगरा) की टीम यहां उत्खनन करने के लिए पहुंची थी। लेकिन, अभी तक कोई खास चीज उनके हाथ नहीं लगी थी। मगर हाल ही में टीम को दो ट्रेंच से हड्डियों और कोयले के टुकड़े मिले हैं, जिसे लेकर अधिकारी उत्साहित हैं। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में हड़प्पाकालीन सभ्यता होने के कई सुबूत पहले मिले हैं, मगर हड्डियों के मिलने के बाद अब कार्बनडेटिंग के जरिये काल के बारे में सटीक जानकारी मिल सकेगी।
पहले विदेश भेजे जाते थे नमूने
इतिहास के शोधार्थी एवं लेखक राजीव उपाध्याय ने बताया कि कुछ साल पहले तक भारत में कार्बन-डेटिंग की सुविधा नहीं थी, मगर अब लखनऊ में बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ तैल्यू बॉटनी तथा अहमदाबाद में फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी के नाम की लैब हैं। इनके अलावा एक लैब दिल्ली में भी है। चूंकि कार्बन-डेटिंग अब अपने देश में ही होने लगी है, ऐसे में रिपोर्ट जल्द आ सकेगी।
अभी तक छह ट्रेंच पर हुआ है काम
डेढ़ महीने से उत्खनन में लगी पुरातत्व विभाग की टीम अभी तक छह ट्रेंच पर काम कर चुकी है। हड्डियों के टुकड़े दो अलग-अलग ट्रेंच से मिले हैं। इसी प्रकार कोयले के टुकड़े भी अलग-अलग ट्रेंच से ही मिले हैं। हड्डियों और कोयले के टुकड़ों को धूप और पानी आदि से बचाकर सुरक्षित रखा जा रहा है, जिससे कार्बनडेटिंग में आसानी रहे।