वेदविहार कॉलोनी निवासी शुभम सब्जी मंडी में एक दुकान पर काम करता था। 30 जुलाई को वह घर से यह कहकर गया था कि नीलकंठ कांवड़ लेने जा रहा है। उसके साथ मौसेरा भाई प्रकाशलोक कॉलोनी निवासी 30 वर्षीय अरविंद और दोस्त सूरज पुत्र दल सिंह भी गए थे। परिजनों के अनुसार, वह बिना बताए केदारनाथ चले गए। 31 जुलाई को रात 11 बजे वीडियो कॉल पर शुभम ने अपने परिजनों को मंदिर के दर्शन कराए। इसके बाद तीनों से कोई संपर्क नहीं हुआ। शुभम के पिता कर्ण सिंह ने बताया कि शुक्रवार शाम केदारनाथ से पुलिस का फोन आया, जिन्होंने बताया कि शुभम का शव मलबे में दबा मिला है। उसके पास से दो मोबाइल मिले थे, जिनसे कॉल की जा रही है। पता चलने पर शुभम का बड़ा भाई और अन्य परिजन वहां के लिए रवाना हुए। शनिवार देर शाम वहां पहुंचकर उन्हें शव की पहचान की। पिता ने बताया कि शुभम की 12 नवंबर को शादी होनी थी। वहीं लापता युवकों के परिजनों में भी गम का माहौल है।
12 नवंबर को बंधना था सेहरा, उठ गई अर्थी
केदारनाथ में मारे गए 24 वर्षीय शुभम की 12 नवंबर को शादी होनी थी। परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था, लेकिन परिजनों को क्या पता था कि जिस बेटे को घोड़ी पर बैठाकर दुल्हन लाने की तैयारी कर रहे हैं, उस बेटे की अर्थी उठानी पड़ेगी। वेदविहार निवासी कर्ण सिंह ने बताया कि उनका बेटा शुभम चार भाई बहनों में सबसे छोटा था। सभी की शादी हो चुकी है। शुभम की 12 नवंबर को शादी होनी थी। परिवार में कार्ड छपवाने की तैयारी चल रही थी। सभी तैयारियां धरी की धरी रह गईं, जब से टीवी में केदारनाथ में हुई घटना की खबरें देख रहे थे, तब से मन बड़ा बेचैन था। तीनों को फोन मिलाया, लेकिन संपर्क नहीं हुआ। भगवान से दुआ कर रहे थे कि तीनों ठीकठाक वापस आ जाएं। शुभम का शव रविवार शाम तक घर लाया जाएगा।