जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने मुसलमानों के घरों और सामाजिक समारोहों में म्यूजिक बजाने, नाच गाने, बैंडबाजों और आतिशबाजी के चलन पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इसे न इस्लाम के खिलाफ बताते हुए कहा कि गैर शरई अमल मुसलमानों की वर्तमान परेशानियों और बेचैनी की एक अहम वजह है।
मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि आज हालात ऐसे हो चुके हैं कि अल्लाह की नाफरमानी को एक तरह का स्टेटस सिंबल (प्रतिष्ठा का प्रतीक) बना लिया गया है। उन्होंने अफसोस जताया कि इस्लाम मे जिन कामों से बचने की मनाही की गई है, वही काम आज खुशी, शोहरत, फैशन और आधुनिकता के नाम पर आम होते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे घरों में कुरआन की तिलावत की जगह म्यूजिक और गानों ने ले ली है, जबकि यही हाल दुकानों का है जहां गानों के शोर ने माहौल को घेर रखा है। हमारी शादियां भी अब इबादत का माहौल नहीं, बल्कि मनोरंजन का मंच बन गई हैं, जहां नाच, गाने, बैंडबाजे और शोर-शराबा अनिवार्य समझा जाना लगा है।
कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि यह सब होते हुए फिर मुसलमान शिकायत करते हैं कि दिलों को सुकून नहीं, घरों में बरकत नहीं और हालात ठीक नहीं है। जब रास्ता ही गलत चुन लिया जाए, तो मंजिल सही कैसे मिल सकती है। उन्होंने मुसलमानों से शादियों को सुन्नत तरीके से करने और इनमें होने वाली फिजूलखर्ची से बचने का आह्वान किया है।