अदालत में हुई सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने कहा कि मामले में सरकार ने आरोपी के ऊपर एनएसए लगाया था। हाईकोर्ट ने भी इसकी पुष्टि की थी। उन्होंने कहा कि विवेचक ने पत्रावली में घायल और मृतकों के मेडिकल भी पुष्ट नहीं किए हैं। कहा कि मामले में विवेचक ने लापरवाही बरती है। सहायक शासकीय अधिवक्ता दीपक सैनी ने अपनी दलील में कहा कि विवेचक की ओर से डॉक्टर्स का मेडिकल, वादी का मेडिकल, दंगे में घायल आरएएफ जवानों के मेडिकल सर्टिफिकेट, तत्कालीन एसडीएम आदि की गवाही नहीं हुई है।
उन्होंने मामले को सिद्ध करने के लिए इनकी गवाही और साक्ष्यों को जरूरी बताया। इस दलील पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनावर सिद्दीकी ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि मामले को काफी समय हो चुका है। पहले ही तीन गवाहों की अनुमति अदालत से मिल चुकी है।
बता दें कि जिले में गुरुद्वारे की जमीन को लेकर दंगा फैल गया था। सहारनपुर में हुए दंगे में तीन लोगों की मौत हो गई थी। 21 लोग घायल हो गए थे। इनमें एक सिपाही और होमगार्ड समेत 11 लोगों को गोली लगी थी। दंगाइयों ने शहर में 100 से अधिक दुकानों और वाहनों में आग लगा दी थी। हालात पर काबू पाने के लिए जिला प्रशासन ने शहरी क्षेत्र के छह थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया था।