अगर मुत्ताकी यहां आ गए तो जावेद अख्तर को इस पर क्या आपत्ति है। यदि उन्हें कोई दिक्कत है तो वह बयान देने के बजाय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री या रक्षा मंत्री से यह सवाल करें कि उन्होंने विदेश मंत्री को क्यों बुलाया है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी यहां आने के बाद मुल्क से समझौते, कारोबार, अमन, इंसानियत और मोहब्बत की बात कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि इस पर किसी को एतराज होना चाहिए।
जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि मेहमान का सम्मान हमारी तहजीब है, तालिबान की नीति नहीं। जावेद अख्तर का बयान हकीकत से से ज्यादा भावनाओं पर आधारित है। देवबंद ने किसी आतंकवादी प्रतिनिधि का नहीं, बल्कि भारत सरकार के बुलावे पर आए एक आधिकारिक मेहमान का स्वागत किया है।
कहा कि हिंदुस्तान की सरजमीं हमेशा से मेहमान नवाज रही है और देवबंद उसी तहजीब की मिसाल है। हमारे बुज़ुर्गों ने हमें सिखाया है कि मेहमान चाहे किसी मजहब, जाति या विचार से क्यों न जुड़ा हो, उसका सम्मान करना इंसानियत और हिंदुस्तानियत दोनों की पहचान है।