धुआं उठने की सूचना मिलते ही रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया। स्टेशन मास्टर केबिन में पहुंचे और ट्रेन को रुकवाया। जब तक कोई समझ पाता तब तक ट्रेन सरसावा से करीब पांच किलोमीटर दूर यमुनानगर की ओर जा चुकी थी। लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर रोका। यात्री नीचे उतर गए।
सूचना पाकर मौके पर पहुंची तकनीकी टीम ने ओएचई वायर काटा और स्थिति को संभाला। काफी मशक्कत के बाद धुएं पर कंट्रोल पाया गया। तकनीकी जांच के बाद करीब 25 मिनट बाद ट्रेन को गंतव्य की ओर रवाना किया।
हालांकि, इस हादसे में किसी यात्री को नुकसान नहीं हुआ, लेकिन धुआं उठने का समय रहते पता चलने के कारण बड़ी दुर्घटना होने से टल गई। वहीं, स्टेशन मास्टर प्रवीश चौधरी ने बताया कि शुरुआती जांच में धुआं उठने का कारण ब्रेक जाम बताया जा रहा है, लेकिन देर शाम तक मामले की जारी थी।
दो ट्रेनें के संचालन पर पड़ा असर
चंडीगढ़ एक्सप्रेस तो प्रभावित हुई। उसके साथ ही ट्रेन नंबर 19325 इंदौर-अमृतसर एक्सप्रेस और 14816 हरिद्वार-श्रीगंगानगर एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से करीब 20-20 मिनट तक सरसावा रेलवे स्टेशन पर खड़ी रही। शनिवार को लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस सरसावा में अपने तय समय से ढाई घंटे पहुंची थी।