स्मार्ट सिटी योजना की दौड़ में शामिल सहारनपुर के हालात बदतर हैं। एक ओर जगह-जगह लगे कचरे के ढेर बीमारियां बांट रहे हैं। वहीं दूसरी ओर निगम द्वारा बनाई गई सड़कें बनते ही टूट रही हैं, जिनसे भ्रष्टाचार की बू आ रही है। इसके अलावा शहरभर में सीवर के मेनहोल खुले हैं, जिनकी वजह से हादसों की आशंका बनी हुई है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन मौन है।
सहारनपुर को नगर निगम बने करीब सात साल बीत चुके हैं। मगर हालात से सहारनपुर किसी भी एंगल से निगम नजर नहीं आता है। स्मार्ट सिटी योजना में शामिल होने के बावजूद निगम की ओर से कचरे के निस्तारण के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। शहर में जगह-जगह लगे कचरे के ढेर बीमारियों के फैलने की वजह बन रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगम के कर्मचारी कई-कई दिन में कचरा उठाते हैं, जिसकी वजह से कचरा जमा हो रहा है। पॉश कॉलोनियों में नालियां चॉक पड़ी हैं। मलिन बस्तियों की तो हालत ही खराब है। इसके अलावा नगर निगम द्वारा पिछले महीने बनाई गई सड़कें बनते ही टूट गई हैं, जिनसे भ्रष्टाचार की बू आ रही है।
पुराना कलसिया रोड पर गांव बिशनपुर वाली रोड, गांव रसूलपुर स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल के सामने की सड़क इसके बेहतर उदाहरण हैं, जो बनने के एक महीने बाद ही ध्वस्त हो गई हैं। इसके अलावा शहर में जगह-जगह सीवर के मेनहोल खुले पड़े हैं। रायवाला में खुला मेनहोल कई लोगों को चोटिल कर चुका है। नवीन नगर में जगह-जगह मेनहोल खुले पड़े हैं, जिनकी वजह से लोग परेशान हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि ऐसी सोच के साथ सहारनपुर स्मार्ट सिटी कैसे बनेगा।
नागरिक भी हैं जिम्मेदार
शहर में गंदगी के लिए कुछ नागरिक भी जिम्मेदार हैं। नेहरू मार्केट, प्रताप मार्केट, शहीद गंज समेत तमाम मार्केट में सफाई कर्मी सुबह-सुबह सफाई कर लेते हैं। मगर इसके बाद बाजार खुलने पर दुकानदार दुकानों से सफाई कर कचरा सड़क पर फेंकते आ रहे हैं। इससे दिनभर मार्केट में कचरा फैला रहता है और लोगों को परेशानी रहती है।
75 % घरों में पेयजल नहीं
नगर निगम शहर में करीब 24 फीसदी घरों में पानी उपलब्ध करा पा रहा है। यानी करीब 75 फीसदी घरों में पानी की व्यवस्था लोगों ने स्वयं की हुई है। तीन साल से चल रही स्मार्ट सिटी योजना की प्रक्रिया के दिन से नगर निगम शत प्रतिशत घरों तक पानी पहुंचाने के दावे कर रहा है, मगर वह दावे केवल कागजी ही साबित हुए हैं।
अनाधिकृत बस, टेंपो स्टैंड और अतिक्रमण
शहर में जगह-जगह गलत तरीके से बस और टेंपो स्टैंड चलाए जा रहे हैं। परिवहन निगम के दोनों बस स्टैंड को कई साल से शहर से बाहर करने की बात कही जा रही है, मगर इस दिशा में अभी तक एक भी कदम नहीं बढ़ा है। घंटाघर पर टेंपो, चकराता रोड पर बस स्टेंड, रेलवे स्टेशन के बाहर प्राइवेट बस स्टैंड आदि अनाधिकृत रूप से चलाए जा रहे हैं। वहीं, शहर में जगह-जगह स्थाई और अस्थाई अतिक्रमण फैला हुआ है। इसे लेकर पिछले कई साल से जिला प्रशासन और नगर निगम दोनों गंभीर नहीं हैं।
नागरिकों को सभी जरूरी सुविधाएं मुहैैया कराने के लिए नगर निगम हर संभव कदम उठा रहा है। जहां कहीं की भी शिकायत मिलती है। उसका भी तुरंत निस्तारण कराया जाता है। यदि कहीं कोई अव्यवस्था है तो उसे भी दूर कराया जाएगा। - ओपी वर्मा, नगरायुक्त।