हिरासत के बाद भड़का विवाद
सांसद के अनुसार पुलिस ने यातायात व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में उन्हें हिरासत में लेकर महिला थाना ले जाया गया। वहां उन्हें करीब दस मिनट तक बैठाकर रखा गया और बाद में छोड़ दिया गया। कुछ देर बाद पुलिस ने सपा के पूर्व राज्यमंत्री मांगेराम कश्यप, कश्यप एकता मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय मेहरा, प्रदेश अध्यक्ष अनुज कश्यप, शीशपाल कश्यप और सत्यपाल कश्यप समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। इसकी जानकारी मिलने पर सांसद कोतवाली सदर बाजार पहुंचीं और धरने पर बैठ गईं।
पुलिस अधिकारियों से तीखी नोकझोंक
धरने के दौरान पुलिस अधीक्षक नगर व्योम बिंदल ने सांसद से बातचीत कर मामला शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन सांसद ने कहा कि जब तक सभी छह लोगों को रिहा नहीं किया जाता, धरना जारी रहेगा। उन्होंने अधिकारियों पर आम लोगों की शिकायतें न सुनने का आरोप लगाया और कहा कि अधिकारियों की इंसानियत मर चुकी है।
महिला थाना प्रभारी से नाराज हुईं सांसद
महिला थाने में थाना प्रभारी ने सांसद से पानी के लिए पूछा, लेकिन सांसद ने कहा कि मैं यहां पानी पीने नहीं आई हूं। इसके बाद जब थाना प्रभारी ने बाहर आते समय उनकी पीठ पर हाथ रखा तो सांसद नाराज हो गईं और कहा हाथ मत लगाना, इतनी हिम्मत नहीं है तुम्हारी। अभी लगाया तुमने हाथ। काफी देर तक सांसद पुलिस अधिकारी पर भड़कती रहीं।
यह है पूरा मामला
21 अप्रैल को शामली के जसाला गांव निवासी मोनू कश्यप का शव पंजोखरा के पास रेलवे लाइन के पास मिला था। परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने प्रेम प्रसंग को लेकर नाराजगी में पार्टी के बहाने बुलाकर शराब पिलाई और बाद में ट्रेन के सामने धक्का दे दिया, जिससे मोनू की मौत हो गई।
थाने में धरना देकर बैठी इकरा हसन और सपा कार्यकर्ता।
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