रामपुर मनिहारान में ललित हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-3 की अदालत ने फैसला सुना दिया। दोषी पत्नी पूजा को उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि दो लोगों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
रामपुर मनिहारान में अवैध संबंधों के चलते ससुरालियों को चाय में नशीला पदार्थ देकर पति ललित की हत्या के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-3 की अदालत ने पत्नी पूजा को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 70 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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वादी मुकदमा अनिल उर्फ राकेश ने थाना रामपुर मनिहारान पर तहरीर दी थी। बताया कि उनके बेटे ललित की शादी पूजा निवासी नकुड़ के साथ हुई थी। आरोप लगाया कि पूजा के पूर्व में भी किसी युवक से संबंध थे और अज्ञात युवकों के फोन आते थे। इस बात को लेकर ललित ने अपनी पत्नी पूजा को समझाने की भी कोशिश की।
बताया कि चार नवंबर 2016 की शाम सात बजे के करीब पूजा ने परिवार के लिए चाय बनाई। चाय पीते ही पूजा की सास संयोगिता की तबीयत खराब हो गई। इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। दूसरे दिन अनिल उर्फ राकेश ने भाइयों से घर जाकर बेटे ललित से इलाज के लिए रुपये लाने को कहा।
बताया कि जब उनके भाई घर पहुंचे तो ललित के गले पर रस्सी से गला घोंटने के निशान मिले। पूजा से जब इस संबंध में बात की तो उसने कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। परिजन बेटे ललित को डॉक्टर के यहां लेकर गए। जहां उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की। जांच के दौरान पूजा, मनोज और सुरेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
विवेचना के बाद मामले को अदालत में दाखिल किया। मामले की पैरवी एडीजीसी दीपक सैनी ने की। सुनवाई के दौरान मृतक की बहन प्रियंका ने अपनी गवाही में अवैध संबंध का जिक्र किया। बताया कि चाय में कुछ नशीला पदार्थ मिला था। घटना वाले दिन जब उसकी माता इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थी तो उसके घर पर सुरेश और मनोज आए थे।
बताया कि सुरेश और मनोज ने उसके भाई ललित का गला घोटा था। नशे के चलते वह कुछ बोल नहीं सकी। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए सुरेश और मनोज को दोषमुक्त किया। बचाव पक्ष ने कम से कम सजा दिए जाने की प्रार्थना अदालत से की। पत्रावलियों पर साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के बाद अदालत ने दोषी पूजा को सजा सुनाई है।
नौ वर्ष बाद मिला परिवार को इंसाफ
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने दो जनवरी 2017 को मामले में आरोप पत्र दाखिल किया। करीब नौ वर्षों तक कानूनी लड़ाई के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला।