वादी आशुतोष गोयल ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। बताया कि उसके पूर्वजों ने संपत्ति (मंदिर) खसरा नंबर 955, 959, 960/1 दरा मिलकाना अन्दरुन दर आबादी नूर बस्ती गढ़ी मलूक को शिवजी महाराज, रामचंद्र महाराज, लक्ष्मण महाराज को रजिस्टर्ड दानपत्र पर दान की थी।
भूमि करीब पौने 18 बीघा है। तभी से भूमि इनके नाम पर चली आ रही है।
बताया कि यह मंदिर सार्वजनिक है। आरोप लगाया कि उसके पिता दिवंगत सुभाष चंद गोयल ने विपक्षियों के साथ साजिश कर अपने जानकारों और रिश्तेदारों के नाम कई बैनामे करा दिए। इसके बाद कुछ लोगों को जमीन पर कब्जा भी दिला दिया। आरोप लगाया कि संपत्ति को खुर्द-बुर्द कर दिया है।
अदालत ने जिलाधिकारी को राजस्व अधिकारियों की एक समिति बनाकर मामले की जांच और आख्या देने के निर्देश दिए। आख्या में बताया कि न्यायालय उपजिलाधिकारी में योजित वाद में खसरा नंबर 995 रकबा 0.4920 हेक्टेयर, खसरा नंबर 959 रकबा 0.1130 हेक्टेयर, 960/1 रकबा 0.6040 हेक्टेयर कुल रकबा 1.2090 स्थानीय नगर निगम में निहित की गई।
अदालत ने कहा कि मूल मालिक ने दानपत्र के माध्यम से भूमि को शिवजी, रामचंद्र, लक्ष्मण महाराज को दान कर समर्पित कर दिया है, फिर भूमि को कैसे व किसके द्वारा शुरू की गई कार्रवाई से उपजिलाधिकारी सदर में दायर वाद के तहत संपत्ति को नगर निगम को राजगामी या लावारिस मानते हुए दिया गया। अदालत ने सुनवाई के बाद थाने को प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए।
इनके खिलाफ हुई प्राथमिकी
आदेश के बाद थाना शहर कोतवाली में अनवार कसाई, फारूक खान, अब्दुल शकूर, अब्दुल कय्यूम, खुर्शीद अहमद, शकूरन, अरशद, अकबर, उज्जैफ, मुस्तकीम, अदीब, चांद बीबी उर्फ फरीदा, हुमेरा नाज, यावर, अतीक, लियाकत अली, फैसल खान, फहमीदा बेगम, कहकशां, शाहिदा, बेबी, रियाज, अहमद, कासिफ खान, फरजाना, दानिश, रुकसार, आशकार, खुर्शीदा, सुल्ताना परवीन, रबिया, अशमा, इरफान, सगीर, कलीम, आयशा, जावेद के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
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