देवबंद। जमीयत दावतुल मुसलीमीन की ओर से जारी हेल्पलाइन पर लगातार लोग शंकाओं को दूर कर रहे हैं। एक सवाल के जवाब में उलमा ने कहा कि अचानक बीमार होने पर रोजा तोड़ा जा सकता है। लेकिन इसकी कजा जरूरी है। प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा से कहा कि रमजान का आखिरी अशरा (अंतिम दस दिन) शुरू हो चुका है। इसमें सबसे बेहतरीन अमल ऐतकाफ (एकांतवास) है। इसका मकसद दुनिया की उलझनों से हटकर अल्लाह की इबादत में मशगूल हो जाना है। कहा कि हर मोहल्ले की मस्जिद में कम से कम एक व्यक्ति को ऐतकाफ में बैठना चाहिए, वरना पूरा मोहल्ला सुन्नत छोड़ने का जिम्मेदार होगा।
सवाल:
मुजफ्फरनगर निवासी जमील ने पूछा कि अगर कोई रोजे की हालत में अचानक गंभीर बीमार हो जाए, और भूखे-प्यासे रहने से परेशानी बढ़ने का खतरा हो तो ऐसी हालत में क्या उसे रोजा तोड़ना चाहिए।
जवाब:
शरीयत में साफ हुक्म है कि कोई व्यक्ति रोजा रखने के बाद अचानक शुगर बढ़ जाने, पेट में तेज दर्द उठने या किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो जाए, जिसका तुरंत इलाज न किया गया तो जान को खतरा हो सकता है, तो ऐसी स्थिति में रोजा तोड़ा जा सकता है, लेकिन बाद में इसकी कजा जरूरी है।
सवाल:
शामली के अली मुजफ्फर ने पूछा कि उनके पास दो गाड़ियां हैं, जिन्हें वह किराए पर चलाते हैं। क्या उन पर जकात अदा करनी होगी।
जवाब:
शरीयत के अनुसार किराए पर चल रही गाड़ी पर जकात नहीं है। क्योंकि वह आमदनी का जरिया है, लेकिन जो किराया इससे हासिल हो रहा है, अगर वह साढ़े बावन तौला चांदी की कीमत के बराबर हो जाता है और उस पर साल गुजर जाता है, तो उस पर जकात अदा करनी होगी।