सहारनपुर। अमेरिका-ईरान युद्ध का असर अब सड़क परियोजनाओं पर भी पड़ने लगा है। तारकोल न मिलने की वजह से जनपद में अनेक परियोजनाएं बीच ही में लटक गई हैं। मौजूदा समय जितनी सड़क परियोजनाएं सहारनपुर में चल रही हैं। उस हिसाब से प्रतिदिन 500 मीट्रिक टन तारकोल चाहिए।
दरअसल, तारकोल कच्चे तेल से निकलता है। युद्ध के चलते कच्चे तेल का आयात प्रभावित है। ऐसे में मथुरा और पानीपत की सरकारी पेट्रोलियम रिफाइनरियों को पर्याप्त कच्चा तेल नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह से तारकोल का उत्पादन बंद हो गया है।
यही कारण है कि तारकोल की सड़कें बनाने वाले ठेकेदारों को तारकोल मिलना बंद हो गया है। यदि कहीं मिल भी रहा है तो वह फरवरी से पहले के रेट से तीन गुना अधिक है। यदि ठेकेदार ऐसा करते हैं तो उन्हें बड़ा नुकसान होगा। यही वजह है कि उन्होंने काम रोक दिया है। ऐसे में एक ओर जहां परियोजनाएं तय समय से पूरी नहीं हो सकेंगी। वहीं, जनता को अधूरी सड़कों से गुजरना होगा।
सरकार देगी बढ़े दाम : हालांकि प्रदेश सरकार ने कहा है कि यदि कोई ठेकेदार सड़क का निर्माण जारी रखना चाहता है तो मार्च के बाद बढ़े तारकोल के दाम का भुगतान सरकार करेगी। यानी मार्च 2026 में तारकोल के जो रेट थे, उतने का ही भार ठेकेदार पर पड़ेगा, लेकिन ठेकेदार हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उन्हें संशय है।
सामग्री की ढुलाई का भाड़ा भी बढ़ा : सड़कों के निर्माण में केवल तारकोल ही नहीं, पत्थर, बजरी व कोरसैंड आदि भी जरूरी होते हैं। जनपद में खनन बंद है। अभी तक ठेकेदार हरिद्वार आदि से किसी तरह खनन सामग्री ला पा रहे थे, लेकिन डीजल महंगा होने की वजह से उनका भी किराया बढ़ गया है। यह भी परियोजनाएं बंद होने का एक कारण है। संवाद