उधर, इसका पता लगते ही विभाग में खलबली मच गई। उप्र पशु चिकित्सा संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार का कहना है कि संगठन द्वारा सामूहिक इस्तीफा तैयार किया गया था, लेकिन शासन को भेजा नहीं गया है और न ही जिलाधिकारी न ही मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को दिया गया है। विभाग के बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप पर इसे डाला गया था। अमरोहा की घटना के विरोध में जनपद और प्रदेश स्तर पर संगठन के पदाधिकारियों के बीच ही मंथन चल रहा था, लेकिन इस्तीफे की कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और शासन ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए छह डॉक्टरों का इस्तीफा मंजूर कर लिया, जबकि किसी चिकित्सक ने अभी त्यागपत्र भेजा ही नहीं है। यह गलत है और इसके विरोध में पशु चिकित्साधिकारी आगे की रणनीति तैयार करने में जुटे हैं।
दबाव बनाना पड़ा भारी
अमरोहा की घटना पर जनपद के पशु चिकित्साधिकारियों का शासन पर दबाव बनाना भारी पड़ गया है। उन्होंने शासन को अमरोहा के पशु चिकित्साधिकारी का निलंबन वापस लेने के लिए आंदोलन की रणनीति तैयार की, जिसको लेकर संगठन स्तर पर चर्चा चल रही थी, लेकिन इसी बीच जब पता लगा कि शासन ने सांकेतिक इस्तीफे को मंजूर कर लिया है, तो विभाग में हड़कंप मच गया है।
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हमारे पास नहीं आया कोई लिखित आदेश
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव सक्सेना का कहना है कि डॉक्टरों ने उन्हें कोई ऐसा पत्र नहीं दिया था। अब सांकेतिक इस्तीफा मंजूर होने की सिर्फ जानकारी मिली है। उनके पास इस संबंध में शासन का कोई आदेश नहीं आया है।