सहारनपुर। कोरोना की तीसरी लहर के निपटने की तमाम तैयारियों और दावों के बावजूद व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं है। नया मामला कोरोना की आरटी-पीसीआर जांच का है, जिसमें अनेक मरीजों की रिपोर्ट नमूने लेने के छह दिन बाद आ रही है। इन छह दिनों में मरीज परिजनों से लेकर गांव और शहर में लोगों से खूब मिल रहे हैं। संक्रमण के छह गुना अधिक गति से फैलने की यह भी एक वजह हो सकती है।
रेलवे की विद्युत लोको शेड खानआलमपुरा में रेलवे के करीब 175 कर्मचारी कार्यरत हैं। 13 जनवरी को यहां करीब 150 कर्मचारियों के नमूने लेकर कोरोना जांच के लिए भेजे गए थे, लेकिन इनमें से 28 कर्मचारियों की जांच रिपोर्ट छह दिन बाद 19 जनवरी को आई है। इन छह दिन में यह कर्मचारी लगातार अपने साथी कर्मचारियों के साथ पहले की तरह काम कर रहे हैं। साथ ही परिजनों के साथ भी सामान्य तरीके से रह रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों की रिपोर्ट छह दिन बाद आना जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग एक सप्ताह बाद मरीज को खुद ही ठीक मान लेता है। यानी इतने दिन बाद रिपोर्ट आने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। इतना ही नहीं, सात दिन बाद रिपोर्ट आने के बाद विभाग की टीम फोन कर मरीज का हाल जान रही है और दवा के बारे में पूछ रही है। कई कर्मचारियों ने आ रहे फोन पर भी अपनी इस शिकायत को दर्ज कराया है, साथ ही इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए उच्चा अधिकारियों से शिकायत की है और व्यवस्था में सुधार की मांग की है। नॉरदर्न रेलवे मेन्स यूनियन के शाखा उपाध्यक्ष सत्यवीर सिंह ने कहा कि यदि जांच रिपोर्ट नमूने लेने के छह से सात दिन बाद ही दी जा रही है तो ऐसी जांच का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि जांच रिपोर्ट आने तक मरीज पता नहीं कितने लोगों और परिजनों को संक्रमित कर चुका होगा।
जांच के लिए दो मशीनें फिर भी देरी
शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन राजकीय मेडिकल कॉलेज में आरटी-पीसीआर जांच के लिए दो मशीनें हैं। इसके बावजूद जांच में छह से सात दिन का समय लग रहे हैं। इससे साबित होता है कि जांच की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। खास बात यह है कि अनेक लोगों के नमूने लखनऊ लैब भी भेजे जा रहे हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन तीन हजार आरटी-पीसीआर जांच की क्षमता है, जबकि प्रतिदिन पांच हजार से अधिक नमूने लिए जा रहे हैं। ऐसे में कुछ मरीजों की रिपोर्ट में देरी हो रही है। इसके अलावा लैब के कर्मचारियों के संक्रमित आने की वजह से लैब बंद रही है। ऐसे में नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे गए थे। यह भी देरी की वजह है।
शिवांका गौड़, नोडल अधिकारी।