सहारनपुर। नगर निगम सहारनपुर परिसर में कई दशक पुराना पुस्तकालय है। हिंदी साहित्य क्षेत्र की हस्तियों की पुस्तकें यहां मौजूद हैं, मगर किताबें पढ़ने वालों का अभाव है। यह अभाव कोरोना की वजह से ज्यादा है, जबकि पहले कभी ऐसा दौर था जब रोजाना ही काफी लोग यहां किताबें पढ़ने पहुंचते थे।
अमर उजाला टीम मंगलवार को नगर निगम परिसर स्थित गांधी पुस्तकालय पहुंची। वहां इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य उमर जलाल मिले, जो साहित्यकार अज्ञेय की एक पुस्तक तलाशने आए थे। उन्होंने बताया कि करीब 20 साल से किताबें पढ़ने का शौक है। पुस्तकालय में हिंदी के तमाम साहित्यकारों की किताबें हैं, लेकिन उर्दू की किताबें और मिल जाएं तो अच्छा होगा।
पुस्तकालय की देखरेख कर रहे सहायक लाइब्रेरियन मुकेश कुमार ने बताया कि पूर्व में सुबह और शाम के समय 20 से 25 लोग किताबें पढ़ने पुस्तकालय में आते थे। जब से कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ और लॉकडाउन लगा, उसके बाद पुस्तकालय में आने वालों की संख्या घट गई। अब रोजाना चार या पांच लोग ही आ पाते हैं।
साहित्य, काव्य संग्रह व नाटकों को प्रमुखता
पुस्तकालय में मुंशी प्रेमचंद, विश्वनाथ पांडेय नारद, डा. जेपी सिंह, राजीव रंजन सुधांशु, जयशंकर प्रसाद, मोहनदास करमचंद गांधी, रविन्द्र नाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद, हजारी प्रसाद द्विवेदी, हरिवंशराय बच्चन, पाण्डेय बेचैन शर्मा सहित सुधा अरोड़ा, मृदुला गर्ग, शेखर जोशी, विष्णु नागर, असलम परवेज, डा. सूर्यकांत शुक्ल, डा. नीलू कपूर, राजेन्द्र यादव, नागार्जुन, विष्णु खरे, शिवानी, सुधीश पचौरी, मोहनदास नैमिशराय सहित अनेक साहित्यकारों की पुस्तकें उपलब्ध हैं। वहीं, स्थानीय लेखकों में पद्मश्री डा. कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर, रमेश चंद छबीला, कृष्ण शलभ, डा. सुरेन्द्र सिंघल, डाक्टर केके शर्मा की किताबें भी मौजूद हैं।
उमर जलाल- फोटो : SAHARANPUR