सहारनपुर। गृहकर एवं जलकर वृद्धि के खिलाफ व्यापारियों का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा। नगर निगम में करीब डेढ़ घंटे तक चले प्रदर्शन में बाहर व्यापारी गरजते रहे, जबकि अधिकारी अंदर जनसुनवाई में बैठे रहे। ज्ञापन लेने सिटी मजिस्ट्रेट को भेजा गया, लेकिन व्यापारियों ने साफ मना कर दिया। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट के साथ अपर नगरायुक्त बाहर आए। तब व्यापारियों ने गृहकर और जलकर वृद्धि को वापस लेने संबंधी ज्ञापन सौंपा।
व्यापारी संगठनों ने प्रदर्शन के लिए 11 बजे का समय रखा था। ऐसे में नगर निगम का एक साइड का गेट बंद कर दिया गया और दूसरी तरफ पुलिस बल और प्रवर्तन दल के अधिकारी तैनात कर दिए गए। बैरिकेडिंग भी की गई थी। व्यापार भवन पर इकट्ठा होने के बाद व्यापारी गाड़ी पर लाउडस्पीकर लगाकर सहारनपुर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के महानगर अध्यक्ष विवेक मनोचा और सुरेंद्र मोहन सिंह चावला के नेतृत्व में करीब 11:35 बजे निगम पहुंचे।
उन्होंने वहीं पर नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। काफी बहस के बाद व्यापारियों को अंदर आने दिया गया। इसके बाद व्यापारियों ने करीब डेढ़ घंटा प्रदर्शन किया। व्यापारियों का कहना था कि गृहकर एवं जलकर में मनमाने ढंग से वृद्धि कर दी गई। जहां चार हजार रुपये टैक्स आता था अब वह 40 हजार तक पार कर रहा है।
सिटी मजिस्ट्रेट ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन व्यापारियों ने नगरायुक्त को बुलाने की मांग, जो अंदर जनसुनवाई में बैठे थे। व्यापारियों का विरोध बढ़ता देख सिटी मजिस्ट्रेट के साथ अपर नगरायुक्त राजेश यादव ने ज्ञापन लिया। व्यापारियों ने चेताया कि यदि मांग पूरी नहीं होने तक हर गली-मोहल्ले में नगर निगम के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के पुतले जलाए जाएंगे। प्रदर्शनकारियों में भाजपा के पूर्व पार्षद पुनीत चौहान, गौतम शंकर सिंघल, सुधीर मिगलानी, यशपाल मैनी, नीरज जैन, अनुभव शर्मा, कुबेर नरूला, विनीत चौहान, लकी बजाज, ललित पोपली आदि शामिल रहे।
n सहारनपुर क्लब का टैक्स 41 हजार रुपये : पार्षद अभिषेक उर्फ टिंकू अरोड़ा ने बताया कि सहारनपुर क्लब, जहां बार, खेल और अन्य गतिविधियां चलती हैं उस पर सालाना टैक्स मात्र 41 हजार रुपये है, जबकि अनेक छोटे प्रतिष्ठानों पर टैक्स लाखों में है। आरोप लगाया कि तमाम अधिकारी सहारनपुर क्लब जाते हैं, जिसकी वजह से वहां कम टैक्स लगाया है। वहीं नगर निगम में आयोजित जनसुनवाई में कुल सात शिकायतें आईं। एक का तुरंत निस्तारण करा दिया गया, जबकि बाकी के के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया।