अधिवक्ताओं ने उच्च न्यायालय से न्यायाधीश की तत्काल निलंबन की मांग और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की न्यायालय कक्ष में घटित घटना पर बार काउंसिल ऑफ उप्र तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक व प्रभावी कार्यावाही अमल में लाए, जिससे कि भविष्य में अधिवक्ताओं के साथ न्यायालयों में इस प्रकार की शर्मनाक व दुखद घटनाएं दोबारा घटित नहीं हो और न्यायिक कार्य प्रभावित होने की संभावनाओं से बचा जा सके।
गाजियाबाद जनपद न्यायाधीश द्वारा न्याय व्यवस्था को छिन्नभिन्न करने का जो प्रयास न्यायालय कक्ष में किया गया वह हर प्रकार से निंदनीय है इस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा किसी भी न्यायिक अधिकारी से नहीं की जा सकती।
यह सर्व विदित है कि बेंच और बार एक रथ के दो पहिये हैं लेकिन न्यायाधीश स्वयं को अधिवक्ताओं से अलग मानकर कार्य करते चले आ रहे हैं। जिससे न्याय की गरिमा को ठेस पहुंच रही है और वादकारियों को उचित न्याय मिलने की संभावनाएं क्षीण होती है। अधिवक्ताओं को बोलने से रोका जाता है जबकि अधिवक्ता अपने वादी की आवाज को न्यायालय में रख रहा होता है। जो किसी भी प्रकार से उचित नहीं है।
हड़ताल के कारण दूर दराज से आए वादकारी अपने मुकदमे में तारीख लेकर वापिस लौट गए अधिवक्ता न्यायालय में उपस्थित न होकर अपने चैम्बर और बार प्रांगण में काली पट्टी बांध कर बैठे रहे। दोपहर 1:30 बजे तक कचहरी परिसर खाली नजर आने लगा।