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समायोजन की प्रक्रिया और विरोध से लटक सकती हैं परियोजनाएं

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सहारनपुर। जल निगम के सरप्लस कर्मियों को नगर निकायों में समायोजित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसको लेकर विरोध के स्वर भी फूटने लगे हैं तो, कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी जल निगम के पास हैं। इसको लेकर परियोजनाओं के कार्य प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है।
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दरअसल, शासन ने सरप्लस कर्मियों को समायोजित करने का मन बनाया है, जिसको लेकर सभी जिलों से जल निगम में कार्यरत कर्मियों की सूची मांगी गई। सहारनपुर से जो सूची भेजी गई, उसमें कहा गया कि यहां फील्ड कार्य करने वालों की संख्या 55 है, जो नियतन के अनुसार पहले ही कम है। मालूम चला है कि इन 55 कर्मियों को सरप्लस की श्रेणी में मान लिया गया है, जिससे इन्हें नगर निकायों में समायोजित किया जा सकता है। वहीं, जिले में ग्रामीण जलापूर्ति की 31 परियोजनाएं, जल निगम द्वारा अनुरक्षित 84 परियोजनाएं और अन्य 20 परियोजनाएं संचालित हं। समायोजन को लेकर हो रहे विरोध की वजह से यह परियोजनाएं भी लटक सकती हैं।
कर्मियों ने धरना देकर जताया रोष
जल निगम परियोजना प्रबंधक कार्यालय परिसर में शनिवार को उत्तर प्रदेश जल निगम संघर्ष समिति ने धरना दिया। इस दौरान अरुण कुमार, सेतू सिंह, सतीश कुमार, मजहर अब्बास, पवन कुमार और अरविंद शर्मा ने कहा कि जल निगम के कर्मियों के पेंशन, वेतन और वेतनमान के मामलों का अब तक हल नहीं हुआ। छह महीने से वेतन नहीं मिल रहा और पेंशन भी नहीं मिल रही। यदि दूसरे विभाग में समायोजन हो जाएगा तो कर्मियों के भुगतान और अन्य मुद्दों का क्या होगा। पूर्व में भी अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किए और शासन स्तर पर भी आवाज उठाई। चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों की मांगे पूरी नहीं की गई तो कार्य बहिष्कार का निर्णय लेने को मजबूर होना पड़ेगा। इस दौरान रविंद्र कुमार, अश्वनी गोयल, राजपाल, रणवीर सिंह, कमलेश, सत्तार, सुनील कुमार, प्रीति गुप्ता, प्रमोद कुमार, संजीव कुमार, अभय सिंह, सुरेंद्र, सीताराम, कृपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
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