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विशेषज्ञों ने मानकों पर परखी आम की प्रोसेसिंग

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सहारनपुर। भारत सरकार के कृषि मंत्रालय की रीजनल प्लांट क्वेरंटाइन विभाग की एक टीम ने शुक्रवार को आम प्रोसेसिंग की गुणवत्ता को परखा। उन्होंने प्रोसेसिंग करने वाली मशीनरी की कार्यप्रणाली को भी जांचा। टीम आम की प्रोसेसिंग संबंधी अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके आधार पर ही जापान सहित अन्य कई देशों से आम के निर्यात ऑर्डर मिलने की संभावना है।
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अपने स्वाद और खुशबू के लिए विख्यात जनपद के आम की विदेशों में अच्छी मांग रहती है। यहां मंडी समिति परिसर में आम की प्रोसेसिंग के बाद उसका विभिन्न देशों में निर्यात होता है। इस बार अभी तक सिर्फ अचार और चटनी आदि के लिए देशी और रामकेला आम का निर्यात लंदन के लिए हुआ है। इसके बाद यहां से दशहरी, लंगड़ा और चौसा आम का निर्यात शुरू होगा। कई देशों में आम निर्यात करने के लिए कड़े मानक हैं। निर्यात के लिए आम को इन मानकों पर खरा उतरना होता है। इसमें आम की वीएचटी से लेकर अन्य प्रोसेस शामिल हैं। टीम में एडिश्नल प्लांट प्रोटेक्शन ऑफिसर योगेश कुमार एवं प्लांट प्रोटेक्शन आफिसर सतवीर सिंह आदि शामिल हैं।
विदेेशियों को भा रहीं ये प्रजातियां
मैंगो पैक हाउस से प्रोसेस होकर कई प्रजातियों के आम का निर्यात होता है। इनमें अल्फांसो, केसर, दशहरी, लंगड़ा, चौसा, कलमी, गुलाब जामुन, मल्लिका आदि प्रजातियों की अधिक मांग रहती है। अल्फांसो और केसर को छोड़कर अन्य प्रजातियों की बागवानी जनपद में बडे़ रकबे में होती है।
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आम प्रोसेसिंग की गुणवत्ता को परखने के लिए भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के रीजनल प्लांट क्वेरंटाइन स्टेशन से एक टीम आई है। जो आम प्रोसेस की तरीकों और मशीनरी की कार्यक्षमता आदि को परख रही है। शनिवार को भी उनका कार्य जारी रहेगा। टीम की रिपोर्ट जापान, दक्षिण कोरिया सहित अन्य देशों को ऑनलाइन भेजी जाएगी। इसके बाद वहां से आम निर्यात ऑर्डर मिलने की संभावना है। -- अशोक गुप्ता, मंडी सचिव।
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निर्यात एक नजर में
वर्ष ----------- मात्रा (किलो में)
2018 ------------- 3,61,595
2019 ------------- 7,27,895
2020 ------------- 2,68,001
नोट: मंडी समिति के आंकड़ों के अनुसार।
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