सहारनपुर । सोना सैयद माजरा में हुए हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। ओवरलोड डंपर की बजरी के नीचे सात जिंदगियों ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। सवाल यह है कि इस हादसे का जिम्मेदार कौन है। तेज रफ्तार डंपर चालक या फिर एनएचएआई, जिसने निर्माण पूरा होने के बाद भी ओवरब्रिज नहीं खोले या फिर लापरवाह पुलिस-प्रशासन, जो ओवरलोड पर लगाम लगाने में विफल साबित हो रहा है। कुल मिलाकर नियंत्रणहीन डंपर और लापरवाह सिस्टम के कारण हंसती खेलती सात जिंदगी मौत की नींद सो गईं।
डंपर चालक : जिम्मेदार नंबर : 1
इस हादसे का सबसे बड़ा जिम्मेदार डंपर चालक है। प्रत्यक्षदर्शी दीपेंद्र, घनश्याम और सुधीर आदि का कहना है कि डंपर की गति काफी ज्यादा थी। अगर स्पीड कम होती तो शायद डंपर चालक ब्रेक मारकर कंट्रोल कर सकता था, लेकिन वह डंपर पर नियंत्रण नहीं कर सका और इतना बड़ा हादसा हो गया।
पुलिस-प्रशासन : जिम्मेदार नंबर : 2
ओवरलोड डंपरों को लेकर आए दिन अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन असर वही ढाक के तीन पात वाला हो रहा है। प्रत्यक्षदर्शी राजपाल और देवेंद्र आदि ने बताया कि ओवरलोड होने के कारण डंपर अनियंत्रित हुआ और कार पर पलट गया, जिस समय कार के ऊपर से बजरी हटाई गई, तब हर कोई हैरान था। करीब पांच फीट ऊंची कार दबकर दो से तीन फिट रह गई थी और सात लाशें उसमें खून से लथपथ हालत में पड़ी थीं। बड़ा सवाल यह है कि ओवरलोड पर कार्रवाई की जा रही है तो फिर यह कैसे पुलिस की आंखों में धूल झोंककर निकल गया।
एनएचएआई : जिम्मेदार नंबर : 3
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का यह क्षेत्र काफी हद तक पूरा हो चुका है। गागलहेड़ी से बिहारीगढ़ तक नौ ओवरब्रिज हैं। कभी इन ओवरब्रिज को वाहनों के लिए खोल दिया जाता है तो कभी बंद कर दिया जाता है। तर्क दिया जाता है कि मरम्मत कार्य चल रहे हैं। फिलहाल कई ओवरब्रिज बंद हैं। सर्विस रोड से ही वाहनों को निकाला जा रहा है। अगर ओवरब्रिज चलता तो डंपर सर्विस रोड से न निकलता। एनएचएआई की कार्यशैली पर सवाल इसलिए भी खड़े हो रहे हैं कि हादसे के बाद आनन-फानन में ओवरब्रिज को खोल दिया गया। अगर वहां मरम्मत की जा रही थी कि हादसे के बाद ओवरब्रिज कैसे खोल दिया गया। अगर ओवरब्रिज पर कोई काम नहीं हो रहा था तो पहले बंद क्यों रखा गया था।
पीड़ित परिवार : जिम्मेदार नंबर : 4
जिस कार में यह हादसा हुआ है वह पांच सीटर थी। नियमत: उसमें पांच लोग बैठ सकते थे, लेकिन उसमें बच्चे समेत सात लोग सवार थे। अगर कार में पांच लोग होते तो कम से कम दो लोगों की जान बच सकती थी।
एक्सप्रेसवे पर हादसे के बाद क्षतिग्रस्त कार।